लगभग 36 घंटे की रिमझिम बरसात और तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगभग अंतिम चरण में पहुंच रही गेहूं की अगैती फसलों के अलावा चना और अरहर को तगड़ी चपत लगी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बारिश और तेज हवाओं ने फसलों को लगभग 10 फीसदी की क्षति पहुंचाई है। इससे इस बार गेहूं, चना और अरहर के उत्पादन में गिरावट तय मानी जा रही है।
लगभग पक चुकी फसलों के लिए हल्की बरसात जरूरी मानी जा रही थी, लेकिन मौसम ने ऐसा मिजाज बदला कि किसानों की धुकधुकी बढ़ गई। शनिवार रात से शुरू हुई रिमझिम बरसात का सिलसिला किसानों को उस समय चुभने लगा, जब बरसात का साथ सरसराती तेज हवाओं ने भी पकड़ लिया। तेज हवा और बरसात ने किसानों को भारी क्षति पहुंचाई। तमाम इलाकों में बालियां ले चुकी गेहूं की फसल गिर गई और अरहर और चना को भी नुकसान हो गया। प्रकृति का यह कोप देखकर किसानों का कलेजा मुंह को आ गया।
बिरहदपुर के किसान शेर बहादुर सिंह ने कहा कि उनकी तकरीबन चार बीघे फसल गिरकर चौपट हो गई। गिरी फसल के उठने की संभावना बेहद कम है। गिरी फसल में चूहे और दीमक के हमले की आशंका भी बढ़ जाती है। सादात बिंदुली के गिरजाशंकर सिंह ने कहा कि बारिश की जरूरत तो थी, लेकिन हवा की नहीं। बरसात के साथ चली तेज हवाओं ने काफी नुकसान पहुंचाया है।
कृषि विभाग अपने आंकड़ों में गेहूं और चने में 10 फीसदी का अनुमानित नुकसान मान रहा है। जबकि अरहर की पांच फीसदी फसल को क्षति पहुंची है। जिला कृषि उप निदेशक अशोक कुमार उपाध्याय के मुताबिक हल्की बरसात से कोई नुकसान नहीं था, लेकिन हवाओं से परेशानी बढ़ी है। एक-दो दिन में मौसम ठीक हो जाएगा तो कुछ गिरी फसल उठ भी सकती है।