केराकत थाना क्षेत्र के बोझावां खरगसेनपुर में पांच वर्ष पूर्व विवाहिता को प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के मामले में वादी मुकदमा द्वारा गवाही के समय बयान से मुकर जाने पर बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के जज एमपी सिंह ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। साथ ही कोर्ट में झूठी गवाही देने पर वादी मुकदमा नेवढ़िया थाना क्षेत्र के धनेसू बिराजीपुर निवासी रमेशचंद्र के विरुद्ध प्रकीर्णवाद दर्ज करते हुए नोटिस जारी की गई है।
नेवढ़िया थाना क्षेत्र के धनेसू बिराजीपुर निवासी रमेशचंद्र ने केराकत थाने में इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि बहन निर्मला की शादी 10 मई 2003 में केराकत थाना क्षेत्र के बोझावां खरगसेनपुर निवासी विक्रमादित्य पुत्र खदेरू राम के साथ किया था। बहन विदा होकर ससुराल गई तो पति का दूसरी औरत संबंध होने की जानकारी हुई। जिसका विरोध करने पर पति विक्रमादित्य, सास बबना, जेठ भोजेनाथ, जेठानी चंद्रकला, ननद मुन्नी औरससुर खदेरू मिलकर उसे प्रताड़ित करने के साथ ही मार पीट रहे थे। 20 जून 2011 को बहन को मार डाला।
पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी कर पति विक्रमादित्य, सास बबना, और ससुर खदेरू के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। गवाही के समय वादी मुकदमा अपने बयान से मुकर गया। जिससे संदेह का लाभ पाते हुए आरोपी बरी कर दिए गए। जबकि न्यायालय में झूठी गवाही देने पर वादी मुकदमा के विरुद्ध प्रकीर्णवाद दर्ज करते हुए नोटिस जारी किया गया है।