पवारा क्षेत्र के बनकट गांव में रविवार की शाम गोली से घायल युवक आशीष पाल की सोमवार को इलाहाबाद के निजी अस्पताल में मौत हो गई। पैसे के अभाव में अस्पताल प्रशासन ने युवक की लाश सात घंटे तक रोके रखी।
पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शव घर वालों को सौंपा गया। पुलिस ने इलाहाबाद में ही पोस्टमार्टम कराके शव परिवार वालों को सौंप दिया।
मछलीशहर कोतवाली क्षेत्र के कटाहित खास गांव निवासी पंधारी लाल पाल का बेटा आशीष पाल अपनी मां उर्मिला के साथ अपने ननिहाल पवारा के बनकट गांव में रहता था।
रविवार की शाम मामूली विवाद में गांव के ही युवक सोनू तिवारी ने उसकी पिटाई कर दी थी। युवक जब अपने घर वालों के साथ उलाहना लेकर उस युवक के घर गया था वहां भी विवाद हो गया।
आरोप है कि इसी दौरान सोनू ने उसे गोली मार दी। उसे इलाहाबाद के जीवन ज्योति अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां सोमवार की सुबह उसकी मौत हो गई।
यह खबर जब घर पहुंची तो कोहराम मच गया। उधर, अस्पताल प्रशासन ने युवक के इलाज के लिए डेढ़ लाख रुपये न चुकाने पर शव रोक लिया। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण परिवार वाले रुपये का इंतजाम नहीं कर सके।
मछलीशहर के सीओ ने इलाहाबाद के पुलिस अधिकारियों से बात की तो सात घंटे बाद शव घर वालों को सौंपा गया। आशीष के चाचा राजकुमार पाल की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी युवक बनकट गांव निवासी सोनू तिवारी और उसके पिता
विनोद कुमार तिवारी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है। उधर, एसपी भारत सिंह यादव सोमवार की सुबह करीब दस बजे बनकट गांव पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया, मगर महज दो सौ मीटर दूर आशीष के घर न जाने पर ग्रामीणों में चर्चा रही। गांव में तनाव को देखते हुए गांव पीएसी और कई थानों की फोर्स तैनात की गई है।