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श्रमजीवी विस्फोट में रोनी को फांसी  

Sun, 31 Jul 2016 01:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
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श्रमजीवी बम विस्फोट कांड के मामले में शनिवार को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भारी पुलिस फार्स के साथ कोर्ट से बाहर निकलता आतंकी मोहम्मद आलमगीर उर्फ रोनी।
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श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन में बम विस्फोट के दोषी बांग्लादेश निवासी मोहम्मद आलमगीर उर्फ रोनी को शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम बुधिराम यादव की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने उसे शुक्रवार को ही दोषी करार दिया था। इस मामले में कुल सात आरोपी हैं। इनमें दो फरार चल रहे हैं। एक की मौत हो चुकी है।
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दो हैदराबाद जेल में बंद हैं। दो के खिलाफ कोर्ट में विचारण हुआ। दूसरे आरोपी ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई के मामले में फैसला दो अगस्त को सुनाया जाएगा।  28 जुलाई 2005 को जौनपुर-सुल्तानपुर रूट पर हरिहरपुर रेलवे क्रासिंग के पास श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन की जनरल बोगी में विस्फोट हुआ था।

इसमें 12 यात्रियों की मौत हो गई थी और 18 गंभीर रूप से घायल हुए थे। मामले में रेलवे के गार्ड जाफर अली ने 28 जुलाई को ही जीआरपी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चार अप्रैल 2006 को स्पेशल सेल दिल्ली ने दो जुड़वा भाई आतंकियों को गिरफ्तार कर श्रमजीवी बम विस्फोट कांड का खुलासा किया था।
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वर्ष 2005 से यह मामला अदालत में चल रहा था। इसमें रोनी के मामले में 53 गवाह और ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई आदि में 42 गवाह पेश किए गए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मो. आलमगीर उर्फ रोनी पुत्र जान मोहम्मद निवासी रानीनगर, सादुर मोड़ (स्काई वीडियो पार्लर तलाई मोड़) थाना बुआलिया, जनपद राजशाही, बांग्लादेश को आईपीसी की धारा 302/149 में मृत्युदंड की सजा सुनाई।

जबकि धारा 148 में तीन वर्ष का सश्रम कारावास, धारा 307/149 में 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं पांच लाख रुपये का जुर्माना, धारा 3 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम में कठोर आजीवन कारावास की सजा एवं पांच लाख रुपये जुर्माना,  रेलवे अधिनियम की धारा 150 में आजीवन कारावास, धारा 151 में पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। 

न्यायाधीश ने अपने फैसले में मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए कहा है कि अभियुक्त की गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक की उसकी मृत्यु न हो जाए। मृत्युदंड की पुष्टि के लिए आवश्यक कागजात के साथ पत्रावली उच्च न्यायालय इलाहाबाद को भेजी जाए। 

कोर्ट के फैसले के बाद मामले में अभियोजन पक्ष से पैरवी करने वाले सहायक शासकीय अधिवक्ता विजय शंकर यादव ने कहा कि इस जघन्य अपराध के लिए दोषी को फांसी से कम सजा मंजूर नहीं थी। उन्होंने कहा विदेश से आकर हमारे देश के नागरिकों की हत्या करने वाले को फांसी की सजा मिलनी ही चाहिए थी।  

 आतंकी आरोपी मोहम्मद आलमगीर उर्फ रोनी के अधिवक्ता श्याम शंकर तिवारी ने कहा कि न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। लेकिन इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
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