नेवढ़िया थाना क्षेत्र में पांच वर्ष पूर्व पहली पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में मंगलवार को एडीजे प्रथम बुधिराम यादव ने पति व उसकी दूसरी पत्नी को दोषी करार देते हुए सात वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने पर छह-छह माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतना होगा। अदालत ने मामले में आरोपी सास व देवर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
अभियोजन कथानक के अनुसार वाराणसी जनपद के बड़ागांव थाना क्षेत्र के धरावन(च्यूटिलिया) गांव निवासी मुन्नालाल पटेल पुत्र शारदा प्रसाद ने नेवढ़िया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा था कि उसने अपनी बहन मनभावती की शादी 1999 में नेवढ़िया थाना क्षेत्र के गोकू गांव निवासी मुन्नालाल पटेल पुत्र राम प्रसाद पटेल के साथ किया था। बहन विदा होकर सुसराल गई तो पति मुन्नालाल पटेल, देवर सुनील पटेल व सास शकुंतला देवी उसे प्रताड़ित करने लगे। इसी बीच मनभावती को एक पुत्री पैदा हुई।
इसके बाद पति मुन्नालाल पटेल ने सदुलहा गांव निवासी श्रीपति की पुत्री मीना से दूसरी शादी कर ली। जिसका मनभावती ने विरोध किया। 23 फरवरी 2011 की रात में मनभावती को उसके ससुरालीजनों ने मारकर पंखे से लटका दिया। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी करके आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष से सहायक शासकीय अधिवक्ता विजयशंकर यादव ने कोर्ट में छह गवाह पेश किया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले को आत्महत्या मानते हुए आरोपी पति मुन्नालाल व उसकी दूसरी पत्नी मीना देवी को दोषी करार देते हुए सात वर्ष का सश्रम कारावास एंव 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है।