क्षेत्र के त्रिलोचन और जलालपुर बाजार में कबाड़ी चोरी की गाड़ियां धड़ल्ले से काट रहे हैं। इनके पास न तो कोई लाइसेंस है और न ही इनके स्तर से प्रशासन को कोई सूचना ही दी जाती है। पूर्वांचल ही नहीं मुंबई, गुजरात और अन्य प्रांतों की गाड़ियों का पार्ट्स अलग-अलग कर के बेचा जाता है। यहीं नहीं गाड़ियों के चेचिस और इंजन नंबर में भी फेरबदल किया जाता है। चर्चा है कि यह सब कुछ पुलिस के संरक्षण में हो रहा है।
सूत्र बताते हैं कि कबाड़ के कारोबारी नई-नई गाड़ियों को धड़ल्ले से दिन और रात में पार्ट खोल कर अलग करते हैं और उसे कबाड़ में बेचते हैं। निश्चित तौर पर ये गाड़ियां चोरी की होती हैं जिनका रजिस्ट्रेशन कागज भी बेचा जाता है। पुलिस सिर्फ कागज देख कर चेकिंग के दौरान छोड़ देती है। ऐसे में इंजन और चेचिस नंबर का मिलान नहीं हो पाता जिसकी वजह से चोरी की गाड़ी खरीदनें वालों की चांदी हो गई है।
खास बात यह है कि कितनी भी बड़ी गाड़ी हो उसे आधे से एक घंटे में ही उसका पार्ट खोल कर पहचान लायक भी नहीं छोड़ते। सूत्रों की माने तो पुलिस इसके एवज में महीना वसूल करती है। जिसकी वजह से यह धंधा दिन दूनी रात चौगुनी गति से चल रहा है। एसओ अनिल सिंह पुलिस वसूली को सिरे से खारित करते हुए बताते हैं कि उन्हें यह पता ही नहीं कि क्षेत्र में कितने ऐसे कबाड़ी हैं जो इस धंधे से जुड़े हैं।