हत्या के आरोप में जेल में बंद युवती के साथ पुलिस हिरासत में गैंगरेप के मामले में दूसरे दिन शुक्रवार को भी मीरगंज पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। उधर, जेल में गर्भवती होेने के दौरान मामले की जांच करने वाले डीआईजी जेल की जांच पर भी सवाल उठने लगा है।
युवती के पिता का आरोप है कि बार-बार जेल अफसरों को उनकी पुत्री अपने साथ हुई घटना की जानकारी देती रही लेकिन उन्होेंने अपने स्तर से कार्रवाई नहीं की। उधर, पुलिस पूरे मामले को फर्जी बता रही है। पुलिस का कहना है कि हत्या के जुर्म से बचने के लिए यह पेश बंदी है।
पवारा थाना क्षेत्र में 30 अक्तूबर को अधिवक्ता की हत्या के बाद युवती को पुलिस ने हिरासत में लिया। युवती कब कैसे गर्भवती हुई इसका खुलासा जेल के मेडिकल जांच में नहीं हुआ। अमर उजाला ने जब मामले का खुलासा किया तो आनन फानन में युवती का आपरेशन कराकर बच्चा पैदा करा दिया गया।
मामले की जांच कारागार मंत्री ने डीआईजी जेल को सौंपी तो उन्होंने क्या जांच की? अब सीजेएम के आदेश के बाद भी केस दर्ज नहीं करना पुलिस की मनमानी का उदाहरण है।