सिपाही और हिस्ट्रीशीटर की हत्या के बाद मौके पर पहुंचे डीआईजी डा. संजीव गुप्ता और एसपी रोहित पी.कनय।
चंदवक थाने के हिस्ट्रीशीटर राधेश्याम सिंह और सिपाही विनय कुमार सिंह की हत्या राजनैतिक वर्चस्व में की गई है। हत्या का कारण ब्लाक प्रमुखी का चुनाव बताया जा रहा है। भूलनडीह गांव निवासी राधेश्याम सिंह जरायम की दुनिया में वर्ष 2000 से ही सक्रिय था।
उस पर चंदवक सहित कई थानों में तकरीबन 20 मुकदमे दर्ज हैं। उसकी हिस्ट्रीशीट संख्या 116ए है। वर्ष 2006 में हत्या जैसे संगीन मामले में भी वह जेल जा चुका था। उधर, आरोपी अजय प्रकाश सिंह उर्फ केडी सिंह भी शातिर अपराधियों में शुमार है।
लखनऊ, उन्नाव सहित कई जिलों में उस पर कई केस दर्ज हैं। केडी का नाम लखनऊ के चर्चित मेहर भार्गव हत्याकांड में भी आया था। एक पूर्व सांसद का करीबी होने के नाते केडी सिंह दो बार ब्लाक प्रमुख रह चुका है।
यही नहीं सुल्तानपुर जिले के लंभुआ विधानसभा से वह पीस पार्टी से विधायक का चुनाव भी लड़ चुका है। 2010 के ब्लाक प्रमुख चुनाव में राधेश्याम सिंह, सुजीत सिंह निवासी कछवन की मदद कर रहा था। केडी सिंह ने उसे मना किया लेकिन वह नहीं माना।
इसी के बाद दोनों में वर्चस्व की जंग छिड़ गई। 2016 के ब्लाक प्रमुख चुनाव में केडी ने अपना प्रत्याशी उतारा था तो बतौर क्षेत्र पंचायत सदस्य राधेश्याम ने उसका विरोध किया और सपा प्रत्याशी शंकर यादव की मदद की । केडी सिंह का प्रत्याशी सिर्फ दो वोटों से चुनाव हार गया। तभी केडी ने राधेश्याम को सबक सिखाने की बात कही थी।