फर्जी इंस्पेक्टर बनकर वाहनों की चेकिंग कर रहे एक युवक को गौराबादशाहपुर पुलिस ने रविवार की देर शाम गिरफ्तार कर लिया। सबसे पहले उसकी वर्दी उतरवाकर उसे कुर्ता-पायजामा पहनवाया गया।
पुलिस ने जब उसकी तलाशी ली तो उसके पास से लखनऊ विकास प्राधिकरण समेत कई विभागों के प्रमुख सचिव के नाम की मुहरें भी मिलीं। वह आजमगढ़ के फूलपुर थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर का रहने वाला है।
एसपी भारत सिंह यादव ने पुलिस लाइन में पत्रकारों को बताया कि गौराबादशाहपुर के विथार गांव के पास रविवार की शाम एक युवक फर्जी इंस्पेक्टर बनकर वाहनों की चेकिंग कर रहा था।
इसी दौरान वसूली को लेकर एक आटो रिक्शा चालक से उसका विवाद हो गया। इसकी सूचना जब गौराबादशाहपुर थाने में तैनात सिपाही अरकान खान को लगी तो वह मौके पर पहुंच गया।
अपरिचित इंस्पेक्टर को देख सिपाही भी भौचक रह गया। उसने इसकी सूचना थानाध्यक्ष विश्वनाथ यादव को दी। थानाध्यक्ष ने जब उस इंसपेक्टर से वाहन चेकिंग का कारण और तैनाती स्थल के बारे में पूछा तो उसने बताया कि
उसकी तैनाती चित्रकूट जिले के कर्वी थाने में है। जब थानाध्यक्ष ने चित्रकूट के एसपी से बात की तो उन्होंने बताया कि इस नाम का कोई इंस्पेक्टर वहां नहीं है।
पुलिस ने जब थाने ले जाकर कड़ाई से पूछताछ की तो उसने सच्चाई उगल दी। पुुलिस को तलाशी में उसके पास से लखनऊ विकास प्राधिकरण का फर्जी नियुक्ति पत्र, स्टांप पेपर, कई विभागों के प्रमुख सचिव की मुहरें और 1640 रुपये
भी मिले। पकड़ा गया फर्जी इंस्पेक्टर र आजमगढ़ के फूलपुर थाना क्षेत्र का सुल्तानपुर निवासी विकास उपाध्याय है। पुलिस ने केस दर्ज कर उसका चालान कर दिया। थानाध्यक्ष विश्वनाथ यादव ने बताया कि खुद को फंसता देख वह माफी मांगने लगा। उसका कहना था कि बेरोजगारी से वह ऐसा कर रहा था।