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ीन एजेंसियां करेंगी आक्सीजन सिलेंडर विस्फोट की जांच

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जौनपुर। शहर के जगदीशपट्टी में आक्सीजन सिलिंडर में विस्फोट की असलियत का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। कयास लगाया जा रहा है कि मिस हैंडलिंग विस्फोट कीवजह हो सकती है। जांच पुलिस के अलावा तीन अन्य एजेंसियों को सौंपी गई है।
जानकारों के मुताबिक आक्सीजन सिलिंडर का नोजल कमजोर होता है। नोजल टूटने पर विस्फोट हो सकता है। इसके अलावा सिलेंडर में नीचे बैरल आयल और वाल्व होता है। रखरखाव में लापरवाही पर सिलिंडर में नीचे भरे आयल का तापमान बढ़ने पर भी विस्फोट हो सकता है। सिलिंडर पुराना होने पर उसकी चद्दर कमजोर होने की वजह से भी हादसा हो सकता है। बहरहाल पूरे मामले की एक्सक्ल्यूसिव कंट्रोलर, असिस्टेंट कमिश्नर ड्रग और फोरेंसिक टीम भी जांच सौंपी गई है। जांच के बाद ही विस्फोट की असली वजह पता चल सकेगी। उधर घटना स्थल के आस पास की कई दुकानों में अभी भी ताला बंद है। मौके पर एक होमगार्ड की तैनाती की गई है। विस्फोट के चलते आस पास की दुकानों का बिजली कनेक्शन भी कट गया है। एजेंसी से बरामद कुल 15 आक्सीजन सिलिंडर को पुलिस ने सुरक्षित रखवा दिए हैं। इसमें से कुछ सिलेंडर भरे हैं और कुछ खाली। मौके से बरामद इन आक्सीजन सिलेंडरों में से एक ही सिलिंडर फटा है, शेष सुरक्षित हैं। एसपी आशीष तिवारी का कहना है आक्सीजन सिलेंडर विस्फोट मामले की असिस्टेंट कमिशनर ड्रग वाराणसी, एक्सक्लूसिव कंट्रोलर, फोरेंसिक विभाग की टीम को जांच सौंपी गई है। वे सभी पहलुओं पर जांच करेंगी।
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पुराने सिलिंडरों में भरी जाती है कम गैस
जौनपुर। सिलिंडर जैसे-जैसे पुराना होता जाता है वैसे ही उसमें रिफिलिंग के दौरान आक्सीजन की मात्रा कम कर दी जाती है। करीब चालीस साल से आक्सीजन सिलिंडर की मदद से वेल्डिंग का काम करने वाले कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नए सिलिंडर में 140 पौंड आक्सीजन भरी जाती है लेकिन पुराना होने पर जब चद्दर कमजोर हो जाती है तो 100 पौंड ही आक्सीजन भरी जाती है। उनका कहना है कि आक्सीजन मेें आग लगने का कोई खतरा नहीं रहता लेकिन गर्म होने पर फट सकता है। लिहाजा उसे आग से दूर रखते हैं।

खौफनाक मंजर को भूल नहीं पा रहे लोग
जौनपुर। लाइनबाजार थाना क्षेत्र के जगदीशपट्टी मोहल्ले में गुरुवार की शाम हुए आक्सीजन गैस सिलिंडर में विस्फोट का खौफनाक मंजर स्थानीय लोग भूल नहीं पा रहे। हादसे को याद कर आभी लोग सहम जाते हैं।
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जगदीशपट्टी तिराहे के पास इलेक्ट्रिशियन मनोज कुमार कहते हैं कि जिस वक्त धमाका हुआ वह दुकान में थे। भागते हुए बाहर निकले तो काला और सफेद धुआं के अलावा कुछ नहीं दिखाई दे रहा था। जिस मकान में विस्फोट हुआ वह गुबार से ढंक गया था। करीब पांच मिनट बाद गुबार हल्का हुआ तो देखा गया कि मकान ढह गया था और चारो तरफ मलहा बिखरा हुआ था। रेलवे क्रासिंग बंद होने के चलते हाईवे पर वाहनों की कतार लगी थी। जहां विस्फोट हुआ था उससके ठीक सामने टूरिस्ट बस खड़ी थी जिसका शीशा टूट कर सड़क पर बिखर गया था और बस के पास ही किसी के हाथ का पंजा कटकर सड़कपर गिरा था। हादसे के करीब दस मिनट बाद लोगों के समझ में आया कि विस्फोट के चलते ऐसा हुआ है। पास में ही स्थित राजन वर्कशाप के मालिक बताते हैं कि जिस वक्त धमाका हुआ तो उसके कंपन से वर्कशाप का शटर अपने आप नीचे गिर गया और उनका एक कर्मचारी अंदर बंद हो गया।
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