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आपरेशन के एक सप्ताह बाद महिला की मौत, हंगामा

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रामपुर। स्थानीय बाजार में स्थित एक निजी अस्पताल में आपरेशन के एक सप्ताह बाद महिला की मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल पर हंगामा किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी लोगों को समझा बुझाकर शांत कराया। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया है। अस्पताल संचालक मौके से फरार हो गया।
रामपुर थाना क्षेत्र के नहरपुर निवासी सुबेदार की पत्नी कलावती देवी (42) का एक सप्ताह पहले रामपुर बाजार में स्थित बाबा अस्पताल में बच्चेदानी का आपरेशन हुआ था। परिजनों का आरोप है कि महिला के आपरेशन के पांच दिन बाद भी कोई आराम नहीं हुआ तो उसे अस्पताल से रेफर करने के लिए कहा गया। पर अस्पताल संचालक ने यह कहते हुए रेफर नहीं किया कि कोई दिक्कत नहीं है। आराम हो जाएगा। सोमवार को सुबह महिला की तबीयत अधिक खराब हो गई तो आननफानन में उसे रेफर कर दिया गया। परिवार के लोग कमलावती देवी को लेकर भदोही के एक निजी अस्पताल पहुंचे जहां उनकी मौत हो गई। परिवार के लोग शव लेकर रामपुर थाने पहुंच गए और बाबा अस्पताल के संचालक पर लापरवाही की आरोप लगाते हुए हो हल्ला मचाने लगे। सूचना पर गांव से ही एक सौ से अधिक की संख्या में लोग निजी अस्पताल पहुंचकर हंगामा करने लगे। स्थिति को भांपकर अस्पताल का संचालक मौके से फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने समझा बुझाकर किसी तरह लोगों को शांत कराया। अस्पताल में तैनात कर्मचारियों का दावा है कि बीएयू से एक डाक्टर को बुलवाकर महिला का आपरेशन करावाया गया था। जबकि परिजन अस्पताल के संचालक ओम मौर्य को मौत का जिम्मेदार मान रहे हैं। अस्पताल के संचालक डाक्टर नहीं है बल्कि वह मरीजों को भर्ती कर बाहर से डाक्टर को बुलवाकर आपरेशन करवाते हैं। परिवार के लोगों का करहना है कि पहले अगर अस्पताल से छोड़ दिया गया होता तो कमलावती देवी की जान बचाई जा सकती थी। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डा. रामजी पांडेय का कहना है कि कहना है कि अस्पताल की जांच की जाएगी। अगर बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल चल रहा है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जिले भर में चलेगा अभियान
जौनपुर। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. रामजी पांडेय ने कहा है कि जिले भर में अभियान चलाकर बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाने वाले संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे अपने इलाके में ठीक से जांच कर लें। अगर कोई नर्सिंग होम या प्राइवेट अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे हैं तो उसकी सूचना दें। इसके लिए उन्हें 15 दिन का मौका दिया गया है। बाद में अगर किसी के इलाके में ऐसे बिना रजिस्ट्रेशन के कोई अस्पताल चलता पाया गया तो संबंधित इलाके के प्रभारी चिकित्साधिकारी की भी जवाबदेही तय की जाएगी।
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