बदलापुर / घनश्यामपुर। महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस अपनी बात से पटलते हुए सोमवार की रात किशोरी से गैंगरेप के चारों आरोपियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। इससे पहले पुलिस का कहना था कि किशोरी खाना बनाते समय झुलसी थी जबकि उसकी मां जलाने का आरोप लगा रही थी। इस मामले में पुलिस की लापरवाही भी जगजाहिर हो चुकी है।
पुलिस ने दस महीने तक गैंग रेप के आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। इसका फायदा उठाते हुए आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने की पूरी कोशिश की। पहले किशोरी को परिवार को धमकाकर उसका गर्भपात कराया। उसके बाद मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बनाते रहे। धमकी देते रहे। डेढ़ महीने पहले किशोरी को जला दिया। उसके बाद पुलिस ने चारों नामजद आरोपियों को गिरफ्तार जेल भेज दिया। उसकी काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल में रविवार की रात मौत हो गई। अंतिम संस्कार करने के बाद सोमवार को सामाजिक कार्यकर्ता रेनू सिंह के नेतृत्व में डेढ़ सौ महिलाएं बदलापुर थाने पहुंची और उन्होंने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए धरना देना शुरू किया तो पुलिस के होश उड़ गए। आनन-फानन में एसपी से बात कर चारों आरोपियों योगेंद्र निगम उर्फ शुद्धू निगम, मनोज निगम, आशीष उर्फ पंडित निगम पर हत्या का मुकदमा देर रात दर्ज कर लिया।
पुलिस अब तक किशोरी को आरोपियों द्वारा जलाने की बात को मानने के लिए तैयार नहीं थी जबकि उसकी मां ने आईजी तक को पत्र लिखकर इसकी सूचना दी थी। पीड़िता की मां ने एक जून 2017 को पुलिस को तीन आरोपितों योगेंद्र निगम उर्फ शुद्धू निगम, मनोज निगम, आशीष उर्फ पंडित निगम के खिलाफ गैंग रेप की तहरीर दी थी। पहले तो पुलिस मुकदमा दर्ज करने से बचती रही। दबाव पड़ने पर मुकदमा दर्ज किया लेकिन आरोपियों को बचाने में लगी रही। मां जब एसपी तक से गुहार लगाई कि आरोपी मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं। 26 अप्रैल को किशोरी झुलस गई तो उसकी मां ने पुलिस को तहरीर दी कि आरोपियों ने ही बेटी को जलाया है। पुलिस यहां भी खाना बनाते समय झुलसने की बात कहकर टालती रही। नतीजतन किशोरी के इलाज तक के लिए कोई सहायता नहीं मिली। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार की रात घर लौटते समय किशोरी का शव सड़क पर रखकर महिलाओं ने प्रदर्शन करना शुरू किया। थोड़ी देर तक पुलिस किचकिच करती रही लेकिन आखिरकार मुकदमा दर्ज कर लिया। हत्या के इस मामले में रेप के तीनों आरोपियों के साथ नागेंद्र निगम का भी नाम शामिल कर लिया गया है।
बदलापुर। पुलिस ने मुकदमे के बाद गिरफ्तारी की होती तो किशोरी की जान बच जाती। मगर पुलिस दस महीने तक सोती रही। जब उसे जला दिया गया तो पुलिस अफसरों की नींद खुली और उन्होंने आरोपियों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया। इसके बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। सामाजिक कार्यकर्ता रेनू सिंह का कहना है प्रशासन के सहयोग नहीं करने से उसका इलाज ठीक से नहीं हो पाया। इस मामले में पुलिस की लापरवाही जगजाहिर है। न्याय की लड़ाई निर्णय होने तक लड़ी जाएगी और सभी दोषियों को सजा दिलवाई जाएगी।