जौनपुर। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर फतेहाबाद के पास गुरुवार को सड़क हादसे में कार सवार आठ साथियों की मौत हो गई थी। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद जौनपुर के सात साथियों का शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। पहले से ही दाहसंस्कार की तैयारी पूरी कर ली गई थी। कहीं दस मिनट तो कहीं आधे घंटे में ही घर से शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए पहुंच गए। गोमती के पिलकिछा घाट पर तीन साथियों की चिताएं एक साथ जलीं। अंतिम संस्कार के दौरान लोगों की आंखें डबडबा गई।
सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के नगहटी के अखिलेश यादव का शव सुबह सात बजे ही घर पहुंच गया। अंतिम संस्कार गोमती नदी के नरौली घाट पर किया गया। पिता तुलसी यादव ने अपने जवान बेटे को मुखाग्नि दी तो लोग रुलाई नहीं रोक सके। सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के सिद्दीकपुर निवासी संतोष कुमार यादव के पुत्र नागेश यादव (22) का शव शुक्रवार को 12.15 बजे दोपहर एंबुलेंस से घर लाया गया। घर से दस मिनट के बाद ही लोग शव लेकर रामघाट पर अंतिम संस्कार करने चले गए। नागेश की मां विमला देवी को बताया गया था कि नागेश को मामूली चोट लगी है। सुबह उन्हें बताया मौत की खबर दी गई। बेटे का शव देखकर विमला देवी अचेत हो गईं। खुटहन थाना क्षेत्र के ओइना गांव निवासी कमलेश यादव, राकेश यादव और बदलापुर थाना क्षेत्र के देवरामपुर गांव निवासी सदाफल तीनों साथियों के शव का गोमती नदी के पिलिकिछा घाट पर एक साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। उमाशंकर यादव ने अपने इकलौते पुत्र राकेश को मुखाग्नि दी। कमलेश के पिता नंदलाल और सदाफल के पुत्र सिंटू (14) ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी खुटहन थाना क्षेत्र के भटपुरा गांव निवासी अनिल कुमार गौतम का शव दोपहर करीब दो बजे घर पहुंचा। शाम को गोमती के पिलकिछा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
घर के अकेले कमासुत सदस्य थे अनिल
खुटहन। भटपुरा निवासी अनिल कुमार गौतम (38) अपने परिवार के इकलौते कमासुत सदस्य थे। अनिल के पिता राम अवध गौतम और माता की पहले ही मौत हो चुकी है। अपने पांच भाइयों में अनिल ही सबसे बड़े थे। एलएलबी करने के बाद उन्होंने नेट की परीक्षा पास कर ली थी। दीवानी न्यायालय में प्रैक्टिस करते थे। उनकी पत्नी चंद्रमा देवी और उनके छह बच्चों का सहारा ही छिन गया। उनके चार पुत्र और दो बेटियों हैं। पुत्रों में अमन (16), अंकित (14), अनुराग (9), नितिन (7) तथा दो पुत्रियां अंजली (12) और आयुषी (7) हैं। इन बच्चों के सिर से पिता का साया छिन गया।
भाई के दुबई से आने के बाद दफनाया गया शव
करंजाकला। आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर हुए हादसे में मृत पोटरिया गांव निवासी सपा के जिला महासचिव हिसामुद्दीन के पुत्र समीद शाह का शव दोपहर एक बजे घर पहुंचा। लोगों की भीड़ पहले से ही हिसामुद्दीन के दरवाजे पर जमा थी। समीद शाह अपने तीनों भाईयों में दूसरे नंबर के थे और उनके चार बच्चे हैं। समीद शाह के बड़े भाई सलामूद्दीन और सबसे छोटे भाई दानिश दुबई में रहते है। खबर मिलते ही दानिश दुबई से घर के लिए रवाना हो गए। वह चार बजे दानिश के घर पहुंचने के बाद शव को गांव की कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
शोक में बंद हुईं दुकानें, स्कूल
बदलापुर। सदाफल यादव की मौत के गम में पूरा गांव डूबा है। गुरुवार की शाम को गांव के किसी भी घर में चूल्हे नहीं जले और शुक्रवार को घनश्यामपुर बाजार में दुकानें बंद रहीं। पत्नी पुष्पा, पुत्री सुलेखा, खुशी, बेटा अभय सहित पिता रामफेर तथा बड़े भाई अरविंद का रुदन सुन, उन्हें ढाढ़स बंधाने का साहस किसी में नहीं हो रही थी। सदाफल की शालीनता और उनके मृदुभाषी होने की चर्चा लोग करते रहे। इस बात की भी चर्चा रही की सदाफल यदि पिता रामफेर ने भाई अरविंद की बात मान लिया होता तो शायद बच जाते। सदाफल के पिता और भाई दोनों सदाफल को उस दिन रात को जाने के लिए मना कर रहे थे। नौकरी की तलाश में सदाफल को जाने पर मजबूर कर दिया। श्रीरामजानकी विद्यालय, माँ शारदा देवी शिक्षा निकेतन, प्रभा विद्या मंदिर, निखिल कान्वेंट स्कूल में शोकसभा बंद कर स्कूलों को बंद कर दिया गया।