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पॉक्सो एक्ट के दोषी को मौत की सजा: कोर्ट की तल्ख टिप्पणी- समाज को हिला देती हैं इस तरह की घटनाएं

Tue, 09 Mar 2021 02:16 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
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Demo Pic - फोटो : google
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम रवि यादव की अदालत ने दुष्कर्म के दोषी को मौत की सजा सुनाते हुए अपराध की भयावहता और उसके सामाजिक प्रभाव को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की। फैसले के जरिये समाज को नसीहत देने की भी कोशिश की। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज को हिला कर रख देती हैं। सामाजिक समरसता भी प्रभावित होती है। जिस समाज में ऐसी घटना होती है, उस समाज के लोगों में एक-दूसरे पर विश्वास कम हो जाता है।

हर व्यक्ति संदेह के घेरे में रहता है। समाज में भय, अस्थिरता और अविश्वास की भावना जन्म लेती है। संयुक्त रूप से पूरे समाज की आशा प्रशासन व न्यायपालिका से रहती है। ऐसे जघन्य व घृणित अपराध को अंजाम देने वालों को कठोरतम दंड दिया जाना ही उचित है। कोर्ट ने फैसले के लिए मोहम्मद मन्नान उर्फ अब्दुल मन्नान बनाम बिहार राज्य, बसंत संपत दुपारे बनाम महाराष्ट्र सरकार, दीपक राय बनाम स्टेट ऑफ बिहार सहित कई अन्य मुकदमों में उच्चतम न्यायालय के फैसलों को आधार बनाया। देखें अगली स्लाइड्स...।
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दोषी। - फोटो : अमर उजाला
कोर्ट ने अपराधी में सुधार की संभावनाओं को भी खारिज कर दिया। अपराधी विवाहित है, लेकिन उसके लिए पारिवारिक मूल्यों का कोई महत्व नहीं है। वह शराबी और फरेबी है। उसने तीसरी शादी की है और साले को मारपीट कर घर से निकालकर उसके घर में जबरन रहता है। उसे कानून का कोई भय नहीं। वह जो चाहता है, वह करता है। शादीशुदा होने के बाद भी आपराधिक मानसिकता के चलते भविष्य में सुधार की संभावना नहीं, बल्कि वह समाज के लिए खतरा है।
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मुकदमे की पैरवी करने वाले सरकारी वकील - फोटो : अमर उजाला
बालिका की पीड़ा रोंगटे खड़े करने वाली
कोर्ट ने कहा कि अपराधी उसी गांव में रहता था। टॉफी का लालच देकर उसने बालिका को अपने पास बुलाया। बालिका ने निश्छल भाव से उस पर भरोसा किया। इसका फायदा उठाकर अपराधी ने मानवता को शर्मसार करते हुए दरिंदगी की। वह पूरी तरह असहाय थी, किसी को मदद के लिए बुला नहीं सकती थी। अपराधी ने उसका नाक व मुंह दबाकर गला घोंटा और चेहरे को जलाने की कोशिश की। बालिका की पीड़ा रोंगटे खड़े करने वाली है।

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पॉक्सो एक्ट का दोषी। - फोटो : अमर उजाला
पीड़िता के परिजनों ने फैसले पर जताया संतोष
कोर्ट ने बालगोविंद को छह मार्च को ही दोषी करार दे दिया था। सोमवार को बस सजा मुकर्रर होनी थी। बेटी से दरिंदगी करने वाले को मिलने वाली सजा जानने के लिए पिता भी कोर्ट में मौजूद रहे। उन्होंने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि मेरी मासूम बेटी की निर्मम हत्या के लिए फांसी से कम सजा मंजूर नहीं थी। कोर्ट ने न्याय किया है। बेटी तो नहीं आ सकती, लेकिन उसकी आत्मा को शांति मिलेगी।
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demo pic
छोटी बहन की गवाही भी आधार
आठ अगस्त को शव मिलने के बाद परिजनों ने बालगोविंद के अलावा उसके साले को भी आरोपी बनाया था। पुलिस की विवेचना में साला निर्दोष साबित हुआ। छोटी बहन ने मजिस्ट्रेट के समक्ष बताया था कि उसे और दीदी को बालगोविंद ही साथ ले गया था। टॉफी बेचने वाले दुकानदार ने भी इसकी पुष्टि की। उनकी यह गवाही मामले में काफी अहम रही।

चंदौली से गिरफ्तार हुआ था बालगोविंद
बालिका के साथ दुष्कर्म और हत्या की वारदात के बाद बालगोविंद अपने गांव चंदौली जिले के सकलडीहा थाना क्षेत्र के पौरा गांव में चला गया था। मूल पते से अवगत न होने के कारण पुलिस कई दिनों तक उसकी तलाश करती रही। बाद में पुलिस टीम ने चंदौली पहुंचकर उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने पूरी घटना बताई तो हर कोई सन्न रह गया।

यह थी घटना
घटना जौनपुर जिले के मड़ियाहूं कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में पिछले साल छह अगस्त की है। अभियोजन के अनुसार यहां अपने ससुराल में रहने वाला चंदौली निवासी बाल गोविंद उर्फ गोविंदा पड़ोस की दो बहनों को टॉफी दिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। टॉफी दिलाने के बाद छोटी बहन को वापस भेज दिया, जबकि 11 वर्षीय बड़ी बहन को खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया।
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