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तीन मासूमों संग दंपती ने एसपी कार्यालय पर की आत्मदाह की कोशिश

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जौनपुर। बटवारे के विवाद से क्षुब्ध होकर एक दंपती ने शुक्रवार को अपने तीन मासूम बच्चों के साथ एसपी कार्यालय के सामने मिट्टी का तेल छिड़ककर आत्मदाह करने की कोशिश की। हालांकि वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें बचा लिया। पुलिस ने पति पत्नी को शांति भंग में चालान कर दिया।
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सुजानगंज थाना क्षेत्र के नगौली गांव निवासी राजेंद्र विश्वकर्मा अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ दोपहर बाद एसपी कार्यालय पहुंचा। जबतक कोई कुछ समझ पाता तबतक उसने मिट्टी के तेल से भरा गैलन बच्चों समेत अपने ऊपर उड़ेल लिया। यह देख रहे आस पास मौजूद पुलिस कर्मियों ने उन्हें पकड़ लिया। घटना को लेकर एसपी दफ्तर में हड़कंप मच गया। कलेक्ट्रेट में मौजूद अन्य लोगों की भी भीड़ जमा हो गई। एसपी पति पत्नी से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसका पारिवारिक बटवारे का विवाद पांच महीने से चल रहा है। पुलिस कोई मदद नहीं कर रही है। इसके लिए उसने सुजानगंज थाने समेत एसपी दफ्तर में भी कई बार प्रार्थना पत्र दिया ले किन पुलिस ने कोई सुनवाई नहीं की। अब उसे न्यय मिलने की उम्मीद नहीं रह गई तो उसने एसपी कार्यालय पर ही बच्चों के साथ आत्मदाह करने का फैसला किया था लेकिन आग लगाने से पहले ही उसे पकड़ लिया गया। पुलिस ने पति पत्नी दोनों को शांति भंग में भंग में चालान कर दिया। इस संबंध मं एसपी विपिन कुमार मिश्र का कहना है कि इनका हिस्सेदारी का विवाद है। कई बार मारपीट हो चुकी है। राजेंद्र विश्वकर्मा पर 308 का केस भी दर्ज है। उसे पुलिस तलाश रही थी लेकिन वह फरार चल रहा था।
घर का अकेला कमासुत सदस्य था रमेश
नेवढिय़ा। स्थानीय थाना क्षेत्र के रसुलहां गांव में शुक्रवार को भूमि विवाद में हुई रमेश गौतम की हत्या की घटना से मातमी सन्नाटा पसरा है। मृतक रमेश गौतम परिवार का अकेला कमासुत सदस्य था। उसकी मौत से जहां दो वर्ष के मासूम के सिर से पिता का साया उठ गया वहीं पत्नी बे सहारा हो गई। मृतक की पत्नी सुनीता अपने दो वर्षीय पुत्र गोलू को लेकर किसके सहारे जिंदगी गुजारेगी यह चिंता सिर्फ सुनीता की नहीं बल्कि नात रिश्तेदार और गांव के लोग भी इस बात से हैरान हैं। रमेश की शादी लगभग 10 वर्ष पहले वाराणसी जनपद के कैथौली गाँव निवासी जैनुनाथ गौतम के बेटी सुनीता से हुई थी।करीब आठ वर्ष बाद रमेश को पुत्र पैदा हुआ। रमेश दो भाई व दो बहनों में तीसरे नंबर का था। बड़ा भाई मुन्ना अपने परिवार संग रोजी रोटी के सिलसिले में दिल्ली रहता है। वह परिवार से अलग रहता है। रमेश किसी तरह कभी दिल्ली में तो कभी गाँव मे मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करता था। उसके माता पिता की दो साल पहले ही मौत हो चुकी है। घर में पति पत्नी और दो वर्ष के बच्चे के अलावा कोई और सदस्य नहीं था। किसी तरह मजदूरी करके रमेश अपने परिवार का भरण पोषण कर पाता था। उसकी मौत से सुनीता का जैसे संसार ही उजड़ गया।
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