पिछले कुछ दिनों से जिले में कोरोना संक्रमण की रफ्तार कम हुई है। नए मरीज मिलने की रफ्तार कम हुई है। पहले जहां ढाई सौ से तीन सौ मरीज रोजाना मिल रहे थे, वहीं अब आंकड़ा सौ तक आ गया है। मौत के मामलों में भी कमी आई है। ऐसे में व्यापारी भी कर्फ्यू में ढील देने की मांग करने लगे हैं।
उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए ही कर्फ्यू लगाया गया था। अब इसमें कमी आई है तो प्रशासन को भी इसमें सहूलियत देनी चाहिए। प्रशासन दुकान खोलने के लिए समय बढ़ाए या रोस्टर की व्यवस्था लागू करे, ताकि जान भी और जहान भी की तर्ज पर व्यापारी अपनी आजीविका चालू रख सकें।
कोरोना कर्फ्यू सरकार की ओर व्यापारियों पर थोपी गई एक ऐसी व्यवस्था है, जिससे व्यापारी आर्थिक व मानसिक रूप से उत्पीड़न का शिकार हो रहा है। व्यापारियों की माली हालत काफी खराब हो चुकी है, इसलिए तत्काल कर्फ्यू में कुछ छूट देना जरूरी है। व्यापार जारी रहेगा तो देश की अर्थव्यवस्था भी आगे बढ़ती रहेगी। -अशोक साहू, व्यापारी।
कोरोना कर्फ्यू के कारण व्यापारियों की आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय हो चुकी है। पिछले एक साल से लगातार व्यापार चौपट हो रहा है। व्यापारियों की पीड़ा समझने की जरूरत है। बनारस सहित आसपास के जनपदों में दुकानों को खोलने की छूट दी जा रही है। ऐसे में यहां भी दुकान खोलने के लिए व्यापारियों को कुछ छूट देना आवश्यक है। -श्रवण जायसवाल, जिलाध्यक्ष अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल।
व्यापारी हर बार सरकार के साथ खड़ा रहा है। इसके बावजूद उनके हितों की ही अनदेखी होती रही है। कोरोना कर्फ्यू की आड़ में व्यापारियों का बेतहाशा उत्पीड़न हुआ है। बिना व्यापारी संगठनों से वार्ता किए ही कर्फ्यू का आदेश थोप दिया गया। अब जब कोरोना का असर कम हो रहा है तो व्यापारियों को भी राहत देनी चाहिए। -अनवारुल हक गुड्डू, व्यापारी।
वर्ष 2020 व 2021 व्यापारियों के लिए बहुत ही दुखद रहा। कोरोना कर्फ्यू से अधिकांश व्यापारियों की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई है। सरकार को इस पर तुरंत विचार कर आर्थिक पैकेज के साथ कर्फ्यू में राहत देनी चाहिए। अगर संभव हो तो जौनपुर को दो भागों में बांट कर नदी के इस पार और नदी के उस पार दुकान खोलने की अनुमति दी जाए। -आशुतोष जायसवाल, व्यापारी।