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यात्रियों का विवरण लिखने वाले लेखपाल समेत 25 को कोरोना

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जौनपुर। जिले में कोरोना के 25 नए मामले सामने आए हैं। इनमें 23 प्रवासी हैं। सुजानगंज के पराहित गांव में तीन लोग पॉजीटिव पाए गए हैं, जिसमें दो सगे भाई हैं। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से आने वाले प्रवासियों का विवरण दर्ज करने वाला सदर तहसील का एक लेखपाल में कोरोना पीड़ित पाया गया है। जिले में कुल संक्रमितों की संख्या अब 207 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग को प्राप्त सूची में एक व्यक्ति का के बारे में पता नहीं लगाया जा सका है। जौनपुर पूर्वांचल का पहला जिला बन गया है, जहां कोरोना के कुल केस की संख्या दो सौ के पार पहुंच गया है। इसमें 110 मरीज स्वस्थ्य हो चुके हैं, जबकि तीन की मौत हो चुकी है।
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बुधवार की सुबह पहले 11 मरीजों की सूची आई। इसमें शहर के ओलंदगंज चौराहे पर एक मकान में सदर तहसील के लेखपाल का भी नाम शामिल रहा। लेखपाल (40) की ड्यूटी रेलवे स्टेशन पर श्रमिकों का नाम-पता और अन्य विवरण दर्ज करने में लगाई गई थी। इस बीच वह कोरोना से संक्रमित हुआ किसी को पता नहीं चला। रिपोर्ट आने से पहले तक लेखपाल में कोई लक्षण स्पष्ट नहीं थे। अब स्वास्थ्य विभाग उसके संपर्क में आए अन्य लोगों की पहचान में जुट गया है। रामनगर ब्लाक के जोगापुर निवासी कांदीवली से आए 45 वर्षीय में एक सप्ताह पूर्व बुखार आने पर 27 मई को सैंपल लिया गया था, जिसकी रिपोर्ट भी पॉजीटिव आई है। सुजानगंज के मुस्तफाबाद में ऑटो से भाई-भाभी और तीन बच्चों के साथ आए युवक (24), मड़ियाहूं के उतिराई बड़ेरी में दिल्ली से आए 41 वर्षीय शख्स, बरसठी के बरेठी कटवा निवासी 23 वर्षीय, बबूरी बेलवना निवासी 35 वर्षीय, भदरांव मलाही निवासी 32 वर्षीय, ओझापुर निवासी 20 वर्षीय और मड़ियाहूं के पाली सुभाषनगर निवासी वृद्ध (60) की भी कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आई। यह सभी मुंबई और दिल्ली से अलग-अलग साधनों से जौनपुर आए थे। सभी के सैंपल 29 मई को लिए गए थे। रिपोर्ट आने से पहले तक इनमें से किसी में भी कोई लक्षण स्पष्ट नहीं था। खुटहन के उसरौली डिहीया निवासी 29 वर्षीय युवक 20 मई को ट्रेन में दिल्ली से आया था। तबीयत खराब होने पर उसे बीएचयू में भर्ती कराया गया था। वह भी कोरोना संक्रमित मिला है। दोपहर में आई 14 मरीजों की सूची में सुजानगंज ब्लाक के पराहित गांव में दो सगे भाइयों समेत तीन युवक पॉजीटिव पाए गए। दोनों भाई मुंबई के काटनग्रिन इलाके में रहकर उबर टैक्सी चलाते थे। 15 मई को वह कार से ही घर आए थे। पॉजीटिव मिला इसी गांव का एक अन्य युवक (33) भी मुंबई में रहता था। वह गोरेगांव में एक फर्नीचर की दुकान पर काम करता था। सिरकोनी ब्लाक के कादीपुर गांव में 38 वर्षीय युवक मुंबई से 27 मई को स्पेशल ट्रेन से प्रयागराज तक आया। वहां से वह मछलीशहर में मौसी के घर चला गया। अगले दिन तबीयत खराब होने पर ग्राम प्रधान रामअचल चौहान ने उसे गांव बुलाकर सीएचसी नेहरुनगर में जांच कराई। टकटकपुर निवासी 30 वर्षीय युवक 19 मई को मुंबई से ट्रक में जौनपुर आया था। उसके साथ ट्रक में 35 अन्य लोग भी सवार थे। ग्रामीणों के मुताबिक गांव आने के बाद हरेंद्र अपने रिश्तेदारी भी गया था। मछलीशहर के कौरहा गांव में पॉजीटिव पाई गई महिला मुंबई के धारावी के पास रहती थी। उसका पति टैक्सी चालक है। दोनों बस से 18 मई को घर आए थे। महराजगंज के जन्नौर निवासी महिला पति और बेटी के साथ मुंबई से ट्रेन में जौनपुर तक आए थे। 30 मई को उसका सैंपल लिया गया था। इनके अलावा मड़ियाहूं के साहोपट्टी, सिरकोनी निवासी किशोरी, सुजानगंज के हरिपुर निवासी वृद्ध, मछलीशहर के आदेपुर, सुजानगंज के रामदेई प्रेम का पुरा और मुंगराबादशाहपुर के सतहरिया के एक-एक युवक की रिपोर्ट कोरोना पॉजीटिव आई है। डीएम दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि सभी मरीजों को कोविड-19 अस्पताल में शिफ्ट कराया जा रहा है। उनके संपर्क में आए अन्य लोगों की पहचान कर सैंपल लेने के निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दे दिए गए हैं।
मरीज को खोजने में छूटे पसीने
जौनपुर। जिले में बुधवार को आई कोरोना पॉजीटिव मरीजों की दो सूची में कुल 25 लोगों के नाम थे, मगर उसमें से 24 का ही पता लग पाया। एक सूची में सुजानगंज के पराहित गांव में चार मरीजों के नाम दर्ज थे लेकिन वहां तीन ही मिले। चौथे मरीज के नंबर पर स्वास्थ्य टीम ने संपर्क करने पर पता चला कि वह दिल्ली में रहता है और उसका नाम वह नही है जो सूची में है। उसने बताया कि इस नाम-पते का कोई भी शख्स उसके संज्ञान में नहीं है। वह दिल्ली से कभी जौनपुर नहीं गया। बाद में स्वास्थ्य टीम ने प्रधान की मदद से गांव में अन्यत्र तलाश कराई, मगर उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। लिहाजा तीन मरीजों को ही साथ लेकर टीम लौट गई। बाद में पता चला कि मरीज सुजानगंज इलाके के पूरा कोदई का रहने वाला है।
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मेरी जांच ही नहीं हुई को कैसे हुआ कोरोना
जौनपुर। स्वास्थ्य विभाग की टीम मछलीशहर के कौरहा गांव में कोरोना पीड़ित महिला को लेने पहुंची तो पता चला कि उसकी जांच ही नहीें कराई गई थी। सूची में जो नाम था, उसके साथ दिया फोन नंबर बंद था। गांव में काफी पूछताछ के बाद पहुंचे स्वास्थ्य कर्मियों ने उसी युवती को साथ कोविड-19 अस्पताल चलने के लिए कहा तो वह भड़क गई। उसका कहना था कि मुंबई से आने के बाद उसकी सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग हुई। उसका नमूना जांच के लिए भेजा ही नहीं गया तो रिपोर्ट कैसे आ गई। उसके बाद नए सिरे से सभी रिकार्ड का मिलान किया गया तो पता चला कि इसी गांव की दूसरी बस्ती में भी एक महिला मुंबई से आई है। वहां पहुंचने पर उसके पति ने बताया कि धारावी के समीप साइन में रहता है। पत्नी को लेकर 18 मई को बस से आया था। अगले दिन ही जांच के लिए नमूना दिया गया था लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। उसके बाद 30 मई को दोबारा सैंपल लिया गया था, जिसमें उसकी पत्नी के कोरोना पीड़ित होने की पुष्टि हुई है।
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