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Jaunpur News: एक ही नाम से दो अस्पतालों का संचालक निकला संविदा चिकित्सक

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शाहगंज---- अस्पताल में पहुंचे मृतका के परिवार के लोग और जांच अधिकारी। संवाद
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शाहगंज (जौनपुर)। एक ही नाम से दो अवैध अस्पताल संचालित करने और ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। मृतका के परिजनों ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए दावा किया है कि इस अस्पताल का असली संचालक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में तैनात एक संविदा चिकित्सक है। बुधवार को पीड़ित परिवार ने जांच टीम के सामने बयान दर्ज कराए। दिपाईपुर गांव निवासी यशपाल बिंद की पत्नी रेखा को गत शुक्रवार को बच्चेदानी के ऑपरेशन के लिए मां शांति अस्पताल (पख्खनपुरा/बड़ागांव) में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के कुछ ही देर बाद रेखा की हालत बिगड़ने लगी और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उसकी मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने अस्पताल का घेराव कर जमकर हंगामा किया था। बुधवार को जब स्वास्थ्य विभाग की टीम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जांच के लिए पहुंची तो मृतका के भाई संजय कुमार ने सीधे तौर पर सीएचसी सुइथाकला में तैनात संविदा चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र शुक्ला और कार्तिक विश्वकर्मा का नाम लिया। परिजनों का आरोप है कि ये सरकारी सिस्टम का हिस्सा होते हुए भी पर्दे के पीछे से निजी अस्पताल चला रहे हैं। इस खुलासे के बाद ग्रामीणों ने संबंधित डॉक्टर की तत्काल गिरफ्तारी की मांग शुरू कर दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रभात सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम हर बिंदु पर जांच कर रही है। परिजनों के बयानों और अस्पताल के पंजीकरण की वैधता की जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद एफआईआर और क्लोजर की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से संचालित इस अस्पताल के बोर्ड पर डेंटल सर्जन डॉ. आरके शुक्ल, जनरल एंड लेप्रोस्कोपिक सर्जन डाॅ. अभिजीत गुप्ता, जनरल फिजीशियन डाॅ. शशांक शुक्ल, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डाॅ. सुनीता पांडेय का नाम उनकी डिग्री के साथ लिखा गया है। बड़ा गांव (बाबू का पुरवां) और पख्खनपुरा में संचालित इस अस्पताल में आधुनिक तरीके से इलाज का भी दावा किया जा रहा है, जिसका उल्लेख अस्पताल के बोर्ड पर किया गया है। दिखने पर यह अस्पताल रजिस्टर्ड लग रहा है, लेकिन इस अस्पताल का मालिक कौन है पता पता स्वास्थ्य विभाग नहीं बता रहा है। इस मामले में राम सुधार यादव को गिरफ्तार किया गया है, जिसने बिना किसी मेडिकल डिग्री के इस ऑपरेशन को किया।
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