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एसटीपी के निर्माण में सुस्ती पड़ी भारी, फर्म पर 29.76 लाख जुर्माने की सिफारिश

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जौनपुर। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण में सुस्ती कार्यदाई फर्म को भारी पड़ गया है। पर्याप्त समय बीतने के बाद भी लक्ष्य से कम काम करने पर जलनिगम फर्म पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी में है। करीब 62 हजार रुपये प्रति दिन की दर से 48 दिनों के लिए यह जुर्माना करीब 29.76 लाख रुपया है। काम की गति में सुधार न होने पर जुर्माना राशि आगे बढ़ भी सकती है।
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नमामि गंगे योजना के तहत शहर के पचहटिया इलाके में 206 करोड़ से एसटीपी का निर्माण चल रहा है। वहीं ढाई सौ करोड़ से अमृत योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। अक्तूबर 2019 से शुरू इस कार्य को इसी वर्ष अक्तूबर तक पूरा होना है। हालांकि कोरोना के कारण लॉक डाउन के चलते तीन माह की छूट भी दी गई है। पिछले डेढ़ वर्ष से चल रहे कार्य के बावजूद अब तक महज 20 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है, जबकि इस समय तक 40 फीसदी से अधिक काम हो जाना चाहिए था। इसके लिए कार्यदाई फर्म की सुस्ती को ही कारण माना जा रहा है। बार-बार बहानेबाजी और टुकड़ों में काम कराने के कारण कार्य को गति नहीं मिल रही। प्लांट को समय से पिछड़ता देख जलनिगम ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। जल निगम के अधिशासी अभियंता ने स्टेट मिशन फार क्लीन गंगा के मुख्य अभियंता को जुर्माने की संस्तुति करते हुए प्रस्ताव भेजा है। इनके काम में इतनी धनराशि भुगतान के समय रोक ली जाएगी। इस बाबत अधिशासी अभियंता जल निगम संजय गुप्त ने कहा कि फर्म को दिसंबर तक 40 फीसद कार्य पूर्ण करना था। इसमें महज 20 फीसद कार्य ही हो सका है। ऐसे में प्रतिदिन 62 हजार रुपये की दर से 48 दिन की पेनाल्टी का 29.76 लाख का प्रस्ताव बनाकर मुख्य अभियंता को भेजा गया है।
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