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अंत:करण की शुद्धि ही ईश्वर है

Mon, 06 Jul 2015 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जौनपुर
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जिस  व्यक्ति के मन में राम का चरित्र समाहित हो जाए तो वह राम मय हो जाता है।  अंत:करण की शुद्धि और पवित्र भाव ही ईश्वर है। हमारी संस्कृति सर्वोपरि  है। वह राष्ट्रीय इंटर कालेज परिसर में रविवार से शुरू हुए नौ दिवसीय कथा प्रवचन के पहले दिन भक्तों के बीच श्रीरामकथा के महात्म पर चर्चा कर रहे थे।
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कहा कि मानव को संसार की परीक्षा, ईश्वर की प्रतीक्षा तथा अपने द्वारा किए हुए कर्म की  समीक्षा करनी चाहिए। सती के श्रीराम की परीक्षा, नवधा भक्ति पर प्रकाश डाला।  कार्यक्रम के मुख्य यजमान और आयोजक अजय शंकर दुबे ने आराध्य गुरु की पूजा कर  स्वागत किया।

इस मौके पर डा. जय प्रकाश त्रिपाठी, कमला  शंकर मिश्र, ब्रह्रदेव दुबे, विधायक सीमा, सुरेश चंद्र दुबे आदि मौजूद थे। कथा प्रवचन हर दिन 10  बजे से एक बजे तक चल रही है। 
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