राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) की जैवलिन थ्रो प्रतियोगिता के फाइनल में एथलीट रोहित यादव पदक जीतने से चूक गए। हालांकि, फाइनल तक पहुंचने की उनकी उपलब्धि से पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है। प्रतियोगिता में भारत को दो पदक मिले। नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर भाला फेंककर रजत पदक जीता, जबकि यशबीर सिंह ने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया।
अदारी-डभिया गांव निवासी सभाजीत यादव के बेटे रोहित यादव ने 12 खिलाड़ियों के बीच हुए फाइनल मुकाबले में 81.56 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए सातवां स्थान हासिल किया। हाल ही में उन्होंने 87.05 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। यदि वह इस प्रदर्शन को दोहरा पाते तो पदक की दौड़ में मजबूत दावेदार माने जा रहे थे।
रातभर टीवी और लैपटॉप पर टिकी रहीं निगाहें
रोहित का मुकाबला देखने के लिए अदारी-डभिया गांव समेत आसपास के क्षेत्रों में देर रात तक उत्साह का माहौल रहा। परिजन रात 12 बजे से ही लैपटॉप के सामने बैठ गए थे। मुकाबला रात 12:45 बजे शुरू होकर तड़के करीब 2:20 बजे तक चला। गांव के लोग और रिश्तेदार पूरी प्रतियोगिता के दौरान टीवी और लैपटॉप की स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहे।
'हार-जीत खेल का हिस्सा, रोहित जरूर जीतेगा गोल्ड'
रोहित के पिता सभाजीत यादव ने कहा, "समुद्र किनारे तेज हवा चलने के कारण भाला सही दिशा में नहीं जा सका। खेल में हार-जीत लगी रहती है। अभी कई बड़ी प्रतियोगिताएं बाकी हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि रोहित एक दिन देश के लिए स्वर्ण पदक जरूर जीतेगा।"
गांव के पूर्व प्रधान रामआसरे यादव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के फाइनल तक पहुंचना ही बड़ी उपलब्धि है। इस बार पदक नहीं मिला, लेकिन रोहित का भविष्य उज्ज्वल है और वह आगे चलकर देश का नाम जरूर रोशन करेगा।
रोहित भले ही इस बार पोडियम तक नहीं पहुंच सके, लेकिन गांव और जिले के लोगों का विश्वास कायम है कि यह उनके लंबे खेल सफर का केवल एक पड़ाव है और आने वाले वर्षों में वह देश के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे।