ठंड ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। समूचा जिला शीतलहरी की चपेट में है। बृहस्पतिवार को सर्द हवाओं के चलते जिले का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री तक पहुंच गया।
बृहस्पतिवार इस सीजन का अब तक सबसे ठंडा दिन महसूस किया गया। गलन बढ़ी तो लोग ठिठुरने लगे। पूरे दिन सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए।
ठंड का प्रकोप बढ़ चला है। सुबह-शाम घने कोहरे ने रेल और सड़क दोनों यातायात पर ब्रेक लगा दिया है। ट्रेनें जहां घंटों विलंब से चल रही हैं, वहीं सड़कों पर वाहनों की गति पर करारा ब्रेक लगा है।
बृहस्पतिवार को सुबह से ही घने कोहरे के कारण यातायात व्यवस्था बेपटरी हो गई। सड़कों पर वाहनों का दबाव घट गया। दिन के दस बजे तक वाहन लाइट जलाकर चले। दृश्यता कम होने से सड़क हादसे भी बढ़ गए हैं।
बृहस्पतिवार को पूरे दिन भगवान भास्कर के दर्शन नहीं हुए। सर्द हवाओं के चलते बढ़ी गलन से दिनभर लोग ठिठुरते रहे। घरों में अलाव जलाकर लोग घंटों के आग के पास बैठे रहे।
कपड़े के अंदर भी लोगों के हाथ-पांव गलते रहे। सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हुई।
आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा रही ठंड फसलों के लिए भी नुकसानदेह बन चली है।
आलू, अरहर और गेहूं के लिए ओस की बूंदे क्षति पहुंचा सकती हैं। कृषि वैज्ञानिक डा. सुरेश कनौजिया के मुताबिक कोहरे के कारण आलू में अगैती झुलसा रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है।
इसमें पत्तियां ऐंठकर गोल हो जाती हैं। इसके लिए कापर आक्सीक्लोराइड या रीडोफिल की 2.5 से 3 ग्राम मात्रा का प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। गेहूं की पहली सिंचाई सल्फर का प्रयोग करना चाहिए।
किसानों को दो बोरे प्रति एकड़ के हिसाब से जिप्सम छिड़क कर तब सिंचाई करनी चाहिए। इससे पत्तियां पीली नहीं होंगी। अरहर में फलीछेदक कीड़े लगने की आशंका रहती है। इसके लिए रोगार या डाईमैथुएट दो ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए। साथ ही डीएपी का छिड़काव फायदेमंद रहता है।