मछलीशहर। तहसील परिसर में वकीलों ने प्रशासनिक और न्यायिक एसडीएम कोर्ट का बहिष्कार कर दिया है। इधर दोनों अधिकारियों ने पुलिस सुरक्षा में दिनभर न्यायालय का काम काज किया है। वकीलों ने बार की बैठक में बृहस्पतिवार को प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष हुबेदार पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को अधिवक्ता भवन में अधिवक्ताओं की आपात बैठक बुलाई गई। इसमें अधिवक्ताओं ने कहा कि आए दिन अधिवक्ताओं के साथ दोनों न्यायालयों में अधिकारियों के कृत्यों से अपमानित होना पड़ता है। पहले सुने गए मुकदमों की सैकड़ों पत्रावलियों में महीनों बाद भी आदेश नही किया गया है। न्यायालय में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 24 एवं धारा 116 के अतिरिक्त अन्य धाराओं के वादों की सुनवाई नहीं होती। तहसील में भ्रष्टाचार चरम पर है। तहसील परिसर में अधिवक्ताओं और वादकारियों के लिए शुद्ध पेयजल, शौचालय, मूत्रालय की व्यवस्था नहीं है। जनता दर्शन में शिकायतों का कोई निस्तारण नहीं होता। कोई अधिकारी कभी क्षेत्र में नहीं जाता, इससे समस्याएं जस की तस हैं। डीएम के आदेश के बाद भी राजस्व कर्मी भूमि की पैमाइश न कर केवल धन वसूली में जुटे हैं। निर्णय लिया गया कि जब तक दोनों अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं आता अधिवक्ता न्यायिक कार्य का बहिष्कार करेंगे। उक्त निर्णय के बाद भारी पुलिस बल की उपस्थिति में बिना अधिवक्ताओं के ही न्यायालय में मुकदमों की सुनवाई की गई। आरोप है कि अधिकांश मुकदमे या तो खारिज कर दिए गए या पत्रावली आदेश में ले ली गईं। अधिवक्ताओं ने निर्णय लिया कि बृहस्पतिवार को धरना प्रदर्शन करेंगे और आर-पार की लड़ाई लड़ने की घोषणा की है।