जौनपुर। पूर्वांचल के नागरिकों की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक उमानाथ सिंह स्वशासी मेडिकल काॅलेज सिद्दीकपुर है, इसके निर्माण की धीमी गति है, इसकी कक्षाएं दो वर्ष से जैसे-तैसे तो शुरू कर दी गई। बावजूद आज तक न तो आईपीडी(अंत: रोगी विभाग) सेवा शुरू हो सका और न ही ठीक ढंग से ओपीडी(बाह्य रोगी विभाग) चल पा रहा है। ओपीडी में कभी जांच न होने के कारण सही तरीके से इलाज नहीं हो पाता है। टाटा व बालाजी को हटाकर नई संस्था शिवांश इंफ्रास्ट्रक्चर को काम दिया गया, जिसने सितंबर तक प्रशासन से आईपीडी सेवा शुरू करने का दावा किया था, वह भी फेल हो गया।
मेडिकल कालेज में एमबीबीएस के तृतीय वर्ष की कक्षाओं से संबंधित बचे हुए काम व एमबीबीएस के चतुर्थ वर्ष का संपूर्ण कार्य बाकी है। पिछले साल सितंबर 2022 में आईपीडी कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया था। इसके तहत सीएम योगी आदित्यनाथ ने निरीक्षण भी किया था। इसके बाद से एक साल बीतने के बाद भी आईपीडी सेवा आज तक शुरू नहीं हो सकी। पुरानी फर्म टाटा जी व बाला जी को शासन स्तर से पत्राचार करने के बाद राजकीय निर्माण निगम ने हटा दिया, अब नई संस्था मेसर्स शिवांश इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ को अगस्त में जिम्मेदारी दी गई। जिसमें संस्था ने प्रशासन से दावा किया था कि ज्यादातर कार्य पूर्ण कर लिए गए है, कुछ ही कार्य शेष है, जिसको अगस्त व सितंबर माह में पूर्ण कर लिया जाएगा। अब आईपीडी कार्य यानी मरीजों को भर्ती करके उपचार करने का कार्य सितंबर तक पूर्ण कर लिया जाएगा।
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2014 से बन रहा मेडिकल कालेज:-
अक्तूबर 2014 में मेडिकल कालेज का निर्माण शुरू करा दिया गया था। इतने वर्षो तक कभी सरकार बदलने का दंश तो कभी बजट के चलते काम की तेजी पर असर पड़ा। काम शुरू हुआ तो कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के अंडर में काम करने वाली पेट्री कांट्रैक्टर टाटा व बालाजी को काम दिया गया। इसकी लागत 554 करोड़ थी फिर इसको बढ़ाकर 569 करोड़ कर दिया गया। अभी तक 65 फीसदी से अधिक काम हुए।
मेडिकल कालेज का काम करने के लिए नए फर्म मेसर्स शिवांश इनफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ को नामित किया गया है। संस्था की तरफ से सितंबर तक काम शुरू करने का दावा किया गया था, फिलहाल जो भी अधूरे कार्य को उनको जल्द पूर्ण कराने का प्रयास किया जाएगा। - अनुज कुमार झा, जिलाधिकारी।