जौनपुर। शहर के गंदा पानी से प्रदूषित हो रही गोमती को बचाने के लिए कार्य शुरू हो गया है। इसके लिए मैपिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अगले सप्ताह 14 नालों से गिरने वाले गंदा पानी को रोकने के लिए सीवर पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। एसटीपी प्लांट बनाने का कार्य पहले से शुरू हो गया है। यह कार्य दो योजनाओं नमामि गंगे और अमृत योजना के तहत किया जा रहा है। दोनों योजनाओं के तहत कुल 470.85 करोड़ रुपये खर्च होने हैं।
तीन लाख आबादी वाले इस शहर में कुल 34 हजार 616 घर हैं। इनसे 25 एमएलडी (मिलियन लीटर) गंदा पानी प्रतिदिन निकलता है, जो 14 नालों के माध्यम से गोमती नदी में गिरता है। इस गंदे पानी को गोमती नदी में गिरने से बचाने के लिए वृहद योजना तैयार की गई है। इसके लिए अमृत योजना में 264.80 करोड़ रुपये स्वीकृत हुआ है। इसमें अगले सप्ताह में पूरे शहर में सीवर पाइप लाइन बिछाकर घरों के गंदा पानी को सीवर कनेक्शन से जोड़ने का कार्य शुरू होगा। दो-तीन दिन में सीवर पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू हो जाएगा। योजना के तहत दो पंपिंग स्टेशन भी बनाए जाने हैं। उधर, नमामि गंगे योजना के तहत स्वीकृत 206.05 करोड़ रुपये से पचहटिया में पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रशासनिक भवन और 30 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्लांट बनाने का कार्य हो रहा है। तीन पंपिंग स्टेशन भी बनेंगे। शास्त्री पुल के पूरब तरफ गंदा पानी प्लांट में ले जाने के लिए पुल बनाया जाएगा। यह सभी कार्य कार्यदायी संस्था एसपीएमएल को 2021 तक पूरा कर देना है।
यहां बनेगा पंपिंग स्टेशन
जौनपुर। गंदे पानी को प्लांट में पहुंचाने के लिए शहर में पांच पंपिंग स्टेशन बनाया जाएगा। यह निर्माण शेखपुर, अलुआघाट, हनुमान घाट, कुत्तुबपुर तिराहा व अबीरगढ़ में किया जाएगा। इन्हीं पंपिंग स्टेशन से नालों का गंदा पानी प्लांट को भेजा जाएगा।
इन स्थानों पर नालों से गोमती नदी में गिरता है गंदा पानी
जौनपुर। शहर का गंदा पानी मुफ्ती मोहल्ला, तुतीपुर, हनुमान घाट, किला मोहल्ला, बलुआ घाट, मलुअना टोला, रासमंडल, अचला देवी घाट, कटघरा, जोगियापुर, मियांपुर, हरईपुर, शेखपुर व अहियापुर नाले से गोमती नदी में गिरता है।
गठित हुई पांच सदस्यीय कमेटी
जौनपुर। प्लांट के निर्माण में आने वाली समस्या के निस्तारण के लिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। जिसमें एसडीएम सदर सत्यप्रकाश व तहसीलदार सदर ज्ञानेंद्र सिंह सहित एई जल निगम, सहायक चकबंदी अधिकारी शहर व संबंधित राजस्व निरीक्षक है। वह निर्माण में आने वाली समस्याओं का निस्तारण कराएंगे।
नमामि गंगे और अमृत योजना के तहत शहर के गंदे पानी को गोमती नदी में गिरने से रोकने के लिए एसटीपी का कार्य शुरू हो गया है। इसे 2021 तक पूरा किया जाना है। कार्यदाई संस्था निर्माण के बाद 15 साल तक इसकी देख भाल भी करेगी। अगले सप्ताह से शहर में सीवर पाइप लाइन बिछाने सहित अन्य कार्य शुरु कर दिए जाएंगे। -सुनील कुमार यादव, एक्सईएन, जल निगम निर्माण खंड।