मछलीशहर। तहसील क्षेत्र के छाछो गांव में चार रामायण के सहयोग से रामलीला का मंचन किया जाता है। नवरात्र में होने वाली रामलीला की शुरुआत कब से हुई इसकी सही जानकारी किसी को भी नहीं है। लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि 120 वर्ष पहले से इस परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। गांव के बच्चे बुजुर्गों में इसे लेकर महीने भर पहले से ही उत्साह देखने को मिलने लगता है। इस बार रामलीला 17 अक्तूबर से शुरू होगी।
आदर्श रामलीला समिति के बैनर तले इस रामलीला का मंचन राम चरित मानस, राम यश दर्पण, राम रहस्य नाटक और राधेश्याम रामायण की सामग्री के समावेश से किया जाता है। प्रोजेक्टर के इस युग में भी रामलीला के सभी स्वरुपों को अपने संवाद कंठस्थ है। सभी स्वरुप मंच पर आने के बाद बड़ी सहजता से अपनी भूमिका अदा करते हैं। नारद मोह से लेकर मेघनाथ वध तक के दृश्यों का सजीव मंचन किया जाता है। मंचन देख लोग भक्तिभाव में डूब जाते हैं। गांव के लोग आजादी के पहले से चले आ रही इस रामलीला को अपनी परंपरा मानते हैं। इस परंपरा को निभाने के लिए एक महीने पूर्व से ही तैयारी शुरू कर दी जाती है। किन स्वरुपों को कौन सी भूमिका निभानी है इसका निर्णय सामूहिक बैठक कर दिया जाता है। पूर्वाभ्यास एक पखवारे पहले से ही शुरू होता है। इसी का नतीजा होता है कि सभी को अपने संवाद याद हो जाते हैं।
किशोर ही बनते हैं श्रीराम-लक्ष्मण और सीता
मछलीशहर। इस रामलीला की एक और विशेषता है। यहां उम्र और शक्ल के हिसाब से रामलीला के स्वरूपों का चयन किया जाता है, जो अपने किरदार को निभाते है। राम, लक्ष्मण और सीता का किरदार निभाने के लिए किशोर ही चुने जाते हैं। समिति के अध्यक्ष दिनेश शुक्ला ने बताया कि इस बार रामलीला 17 अक्तूबर से शुरू होगी। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। एक पखवारे पहले से ही पात्रों को रोजाना अभ्यास कराया जा रहा है।