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पूविवि के कुलसचिव महेंद्र कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज

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करंजाकला। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलसचिव महेंद्र कुमार के खिलाफ एसआईटी ने फर्जी डिग्री व दस्तावेज में हेराफेरी करने के मामले में मुकदमा दर्ज किया है। मामला सात वर्ष पूर्व संपूर्णानंद विश्वविद्यालय का है। जांच के बाद मामले में कार्रवाई हुई है।
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 17 अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि 2004 से 2014 के बीच तैनात रहे 17 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्रियां बांटीं थीं जिसमें 1300 से अधिक लोगों को सरकारी नौकरी भी मिल र्गईं थीं। मामला वर्ष 2015 का है। फर्जी डिग्री के सहारे बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती की शिकायत मिली थी। सभी डिग्रियां संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से जारी की गई थी। शासन ने जब डिग्रियों को सत्यापन के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय भेजा तो कर्मचारियों की मिलीभगत से उसे सत्यापित भी कर दिया गया। इसकी जांच एसआईटी को सौंपी गई थी।
एसआईटी ने प्रदेश के सभी जिलों में लगभग 6000 डिग्रियों की जांच कराईं जिसमें 1130 डिग्रियां फर्जी पाईं गईं। 207 शिक्षकों के दस्तावेजों में हेराफेरी मिली। एसआईटी ने डिग्री जारी करने और डिग्री के सत्यापन की प्रक्रिया से जुड़े लोगों को अपनी जांच में दोषी मानकर इनके खिलाफ बुधवार को मुकदमा पंजीकृत किया है। उसमें पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलसचिव महेंद्र कुमार का भी नाम शामिल हैं। इस मामले में पूविवि के कुलसचिव महेंद्र कुमार का कहना है कि संपूर्णानंद विश्वविद्यालय में उन्होंने काम किया है लेकिन मामला क्या है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्हें किसी ने सूचना भी नहीं दी है।
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इनके खिलाफ की गई जांच
कार्यवाहक उप सचिव कौशल कुमार वर्मा, सहायक कुल सचिव दीप्ति मिश्रा व महेंद्र कुमार, कार्यालय प्रभारी कृपा शंकर पांडेय, भगवती प्रसाद शुक्ला, मिहिर मिश्रा, हरि उपाध्याय, त्रिभुवन मिश्र, सिस्टम मैनेजर विजय मणि त्रिपाठी, कार्यालय अधीक्षक विजय शंकर शुक्ला, प्रोग्रामर मोहित मिश्रा और सत्यापन अधिकारी शशींद्र मिश्र के नाम शामिल हैं।
शासन में लंबित है 1130 शिक्षकों की बर्खास्तगी की कार्रवाई
एसआईटी के एक अधिकारी ने बताया कि फर्जी डिग्री के मामलों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में 40 से अधिक एफआईआर दर्ज है। यह एफआईआर उन शिक्षकों के खिलाफ भी है, जिन्होंने फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी हासिल कर ली थी। एसआईटी ने सभी शिक्षकों की बर्खास्तगी के लिए शासन को पत्र भेजा था। शासन स्तर पर इन शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई लंबित है।
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