शारदा सहायक नहर खंड-39 से निकले नरायनपुर रजवाहा का तटबंध सोमवार की शाम अगहुआं-भटहर गांव की सीमा पर टूट गया। इससे कई किसानों की दो सौ एकड़ फसल डूब गई। फसल पानी में डूबने से किसानों की परशानी बढ़ गई है।
किसानों का आरोप है कि जरूरत से ज्यादा पानी छोड़े जाने के कारण नहर का तटबंध टूट गया, जबकि नहर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छेड़छाड़ के चलते नहर की पटरी टूटी है।
शारदा सहायक नहर खंड-39 का नरायनपुर रजवाहा प्रतापगढ़ जिले के कहला गांव से निकला है। मीरगंज क्षेत्र के अगहुआं-भटहर गांव की सीमा पर कुलाबा संख्या 147 के समीप सोमवार की शाम करीब चार बजे नहर का तटबंध ओवरफ्लो होने के कारण टूट गया।
तटबंध अचानक टूटने से देखते ही देखते अगहुआं, भटहर, याकूबपुर, हवेली आदि गांवों की लगभग दो सौ एकड़ गेहूं और अन्य फसलें डूब गईं। फसलें पानी डूबने से किसानों में खलबली मच गई।
ग्रामीणों ने इसकी शिकायत नहर विभाग के अधिकारियों से की। जानकारी मिलने के बाद विभाग के दो चौकीदार शाम को पहुंचे, लेकिन शाम होने के कारण चौकीदार नहर बांधने में असमर्थता जताकर लौट गए।
उनका कहना था कि नहर मंगलवार को सुबह बांधी जाएगी। इसके बाद वे चले गए। चौकीदारों के लौटने से घबराए ग्रामीणों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी कार्यालय और मंत्री जगदीश सोनकर से की।
शिकयत के बाद हरकत में आए नहर विभाग के कर्मचारी रात 12 बजे मौके पर पहुंचे और रात मंे नहर बांधने का कार्य शुरू किया गया। मंगलवार को सुबह 10 बजे तक नहर बांधने का काम पूरा किया गया।
हालांकि तब तक अगहुआं गांव के किसान राम सनोरथ, लालमणि, ब्रह्मदेव, धर्मदेव, वासुदेव, जगदीश प्रसाद, हरिनारायण, अवधेश, रामहीत, रामयश, दान बहादुर यादव, देव नारायण, छोटेलाल, दूधनाथ, लालता प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद,
राधेश्याम मौर्या, सालिक राम, लालजी, चकिया भटहर गांव निवासी उमा तिवारी, कल्लू तिवारी, दयाशंकर, प्रेमशंकर, रविशंकर, सारंगधर, गुलाब तिवारी, धरनीधर, रमाकांत, लोले आदि किसानों की फसलें जलमग्न हो चुकी थीं।
फसलें जलमग्न होने से किसान चिंतित है गए हैं। उन्हें फसलें बरबाद होने की चिंता सताने लगी है। किसानों ने आरोप लगाया कि नहर विभाग की लापरवाही के चलते नहर टूटी है।
उनका कहना है कि जब जरूरत होती है तब नहर में पानी नहीं छोड़ा जाता है और और अब जरूरत से ज्यादा पानी छोड़ दिया गया। उनका यह भी कहना था कि विभाग ने नहर बांधने में तत्परता दिखाई होती तो काफी फसल बच सकती थी। फसल बर्बाद होने से अब किसानों की परेशानी बढ़ जाएगी।