राखी बांधने के लिए जिला कारागार के मुख्य द्वार पर खड़ी महिलाएं।
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भाई और बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन गुरुवार को धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनसे रक्षा का वचन लिया। भाइयों का मुंह मीठा कराया। उसके बदले में भाइयों ने बहनों को उपहार भेंट किए। राखी बांधने के लिए कुछ बहने जहां भाई के घर के पहुंची तो कु छ भाई खुद बहनों के घर पहुंचे और राखी बंधवायी। सुबह से ही घरों में उत्साह का माहौल रहा। लोग सवारी के लिए परेशान दिखे।
रक्षा बंधन भाई बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। रक्षा बंधन को लेकर सुबह से घरों में खासा उत्साह का माहौल रहा। व्रती बहनों ने सुबह तैयार होकर पूजा की थाली सजाई और भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी आरती उतारी। पर्व की एक और खासियत यह है कि यह धर्म जाति व देश की सीमाओं से परे है। राखी के रूप में बहन द्वारा बांधा गया धागा धन, शक्ति, हर्ष और विजय देने में समर्थ माना जाता है।
उधर तमाम बहनें अपने उन भाइयों को राखी बांधने जेल पहुंचीं जो किसी न किसी मामले में जेल में बंद हैं। जेल पर सुबह से ही बहनों की भीड़ जमी थी। जेल प्रशासन ने रक्षाबंधन पर बंदियों के लिए खास इंतजाम किया था। जिनकी बहने राखी बंाधने नहीं गई उनके चेहरे पर उदासी के भाव थे। महिला समाख्या सहित कई स्वयं सेवी संगठनों की महिलाओं ने बंदियों को राखी बांधी।
वहीं बहनों ने राखी बांधी तो भाइयों ने उन्हें उपहार दिए साथ ही उनकी रक्षा का वचन भी दिया। इस दौरान कई भाई-बहन भावुक हो उठे। पास खड़े लोगों की आंख्ाें भी नम हुए बिना नहीं रह सकीं।