विभाग की नजरें इनायत होती तो एक दशक पहले बना ग्रामीण स्टेडियम बनपुरवा अपने उद्देश्य को पूरा करता। हालत यह है कि खिलाड़ियों के खेलने से गुलजार रहने वाला यह स्टेडियम देख-रेख के अभाव में अपना अस्तित्व दिन प्रतिदिन खोता जा रहा है।
जबकि इस स्टेडियम का निर्माण ह़ुआ था तो क्षेत्र वासियों के खुशी का ठीकाना नहीं रहा। ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ी हर रोज अपनी प्रतिभा को निखारने का काम करते थे।
युवा कल्याण ग्रामीण अभियंत्रण के पूर्व मंत्री श्रीराम यादव के प्रयास से 1994-95 में बनपुरवा गांव में ग्रामीण स्टेडियम का शिलान्यास हुआ था। इस स्टेडियम को बनाने के लिए 25 लाख 97 हजार रुपया स्वीकृत हुआ था,
लेकिन आरईएस विभाग द्वारा उक्त स्टेडियम को 23 लाख 31 हजार 403 रुपए में ही बनवा दिया था। साथ ही धर आरईएस ने स्टेडियम को 1996-97 में युवा कल्याण विभाग को हैंडओवर कर दिया गया था।
शेष धनराशि कहां गई। इसका किसी के पास कोई हिसाब नहीं है। उसी समय अभिलेखों में गड़बड़ी मिलने पर तत्कालीन जिला युवा कल्याण अधिकारी अमित श्रीवास्तव सहित नौ क्षेत्रीय खेल अधिकारी को निलंबित भी हो चुके हैं।
बावजूद इसके स्टेडियम की दशा सुधरने की बजाय आए दिन बदहाल होती जा रही है। हालत यह है कि स्टेडियम में पानी व शौचालय की सुविधा नहीं है। महिला खिलाड़ियों के रहने की भी कोई सुविधा नहीं है।
इतना ही नहीं ग्राउंड की स्थिति भी बदहाल है। बावजूद इसके विभाग द्वारा महिलां वर्ग का विभिन्न खेलो का आयोजन हर वर्ष किया जाता है। जिससे महिला खिलाड़ियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
उनको असुरक्षा का भय हर समय व्याप्त रहता है। जबकि स्टेडियम में 2005 में चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव सहित अमर सिंह व राजबब्बर भी आ चुके हैं। बावजूद इसके बदहाली पर किसी की निगाह नहीं पड़ी है।