ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय का भवन बनकर तैयार जरूर हो गए हैं पर ग्राम पंचायतों को हैंडओवर करने से पहले ही जर्जर हाल में पहुंच गए हैं।
बीआरजीएफ (पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि) से मुफ्तीगंज ब्लाक के आठ ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय की बुनियाद वर्ष 2009 में रखी गई थी। तमाम जांच पड़ताल और शिकायतों के बीच भवन का ढांचा तो खड़ा हो गया लेकिन छह
साल के भीतर ही ये भवन जर्जर हो गए। आठ मिनी सचिवालयों पर 1.32 करोड़ का बजट खर्च किया गया है। जो निरर्थक साबित हो रहा है।
मिनी सचिवालय बनाने के लिए बड़ी आबादी के गांवों का चयन किया गया था। मुफतीगंज ब्लाक के पसेवां, मटियारी, सूरतपुर,मेहवड़ा, उमरी, पित्तुपुर, भुरली, जमुवारी ग्राम पंचायत में मिनी सचिवालय का निर्माण कराया गया है।
प्रत्येक मिनी सचिवालय के भवन निर्माण की लागत 16.50 लाख तय की गई थी। योजना थी कि जिन गांवों में मिनी सचिवालय बनाया जाएगा वहां सचिव, लेखपाल, ग्राम रोजगार सेवक से लेकर ग्राम पंचायत स्तर के सभी अधिकारियों
की स्थायी तैनाती की जाएगी। गांव के विकास का खाका इसी मिनी सचिवालय में ग्राम पंचायत सदस्यों और जनता के साथ बैठक में तैयार करने की योजना थी। भवन का निर्माण शुरू हुआ तभी से इस पर ग्रहण लग गया। गुणवत्ता
की जांच के लिए तीन बार कमेटी बनाई गई। जांच होती रही और ठेकेदार भवन का ढांचा खड़ाकर भुगतान लेने की जुगत में लगे रहे। निर्माण के छह साल बात किसी भीव मिनी सचिवालय को ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित नहीं किया जा सका।