जलालपुर के मोजरा गांव में चल रही कथा को श्रवण कराते कथा वाचक। संवाद
- फोटो : बहराइच में सिर पर गमछा रखकर जाता युवक।
जलालपुर। क्षेत्र के मोजरा ग्राम में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के छठवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा में अयोध्या धाम से आए मानस मर्मज्ञ कथा व्यास संत पुरुषोत्तम दास महाराज ने कहा कि रामकथा में जीवन का सार समाहित है। व्यासपीठ से उन्होंने प्रभु श्रीराम के वनगमन, निषादराज गुह से मिलन और श्रृंगवेरपुर के केवट प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु संगीतमय भजनों पर झूमते और प्रभु श्रीराम के वनवास की कथा सुनकर भावुक हो उठे। पूरा पंडाल राममय हो गया। कथावाचक ने श्रृंगवेरपुर धाम की महिमा का बखान करते हुए बताया कि जब भगवान श्रीराम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ गंगा किनारे पहुंचे तो उन्होंने केवट से नाव मांगी। लेकिन केवट ने यह शर्त रखी कि पहले वह उनके चरण धोएगा। केवट ने कहा कि जब तक वह प्रभु के चरण नहीं धो लेता, तब तक उन्हें नाव पर नहीं बैठाएगा। उसे आशंका थी कि चरण धूलि से कहीं उसकी नाव भी अहिल्या की तरह न हो जाए। इस प्रसंग को सुनकर पंडाल में मौजूद कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। केवट की भक्ति और भगवान के प्रति उसके निश्छल प्रेम के वर्णन ने सभी को भावविभोर कर दिया। कथा पंडाल में कृष्ण मोहन दुबे, आलोक दुबे, ग्राम प्रधान जय सिंह यादव, त्रिभुवन सिंह, जय प्रकाश दुबे और शिवेंद्र प्रसाद मिश्रा मौजूद रहे।