शहर को सुंदर बनाने में पीपीपी मॉडल (सार्वजनिक-निजी साझेदारी) का भी अहम रोल है। दर्जन भर चौराहों का सुंदरीकरण इसी मॉडल के तहत कराया गया है। जिस पर तकरीबन दो करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। चौराहों को और अच्छे तरीके से विकसित करने की योजना बन रही है।
जिसके तहत पार्क, पार्किंग, पीने का पानी और शौचालय की भी व्यवस्था होगी। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद वैसे तो डेढ़ वर्ष पहले ही शुरू हो गई थी, लेकिन अब चौराहों का सुंदरीकरण दिखने लगा है। कई चौराहों पर न केवल फव्वारे शान बढ़ा रहे हैं बल्कि पार्काें में बैठकर लोग आनंद भी ले रहे हैं।
पहले चौराहों पर जाम जैसी स्थित पैदा हो जाती थी लोग उधर से गुजरने में परहेज करते थे। लेकिन इधर कुछ महीनों से लोग चौराहा देखने निकलते हैं। चौराहों को विकसित करने में पीपीपी माडल का प्रयोग किया गया।
इसके तहत जेसीज चौराहा अमरावती ग्रुप को, पचहटिया डा. शकुंतला, वाजिदपुर यूबीआई, सिपाह गहना कोठी, पालीटेक्निक एसबीआई, कलीचाबाद मां तारा हास्पिटल, मुरादगंज ईशा हास्पिटल, बड़ी मस्जिद मोहम्मद हसन पीजी कालेज, रोडवेज और लाइन बाजार पीएनबी, नईगंज मां दुर्गा सीनियर सेकेंड्री स्कूल,
चहारसू कीर्ति कुंज, बदलापुर पड़ाव अभिनव स्टील, जोगियापुर तिराहा लायंस क्लब आदि को दिया गया। जिन्होंने इन चौराहों को विकसित करने में तकरीबन दो करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह अलग बात है कि कई चौराहों पर स्थिति खराब हो गई है। जिसे दोबारा दूसरी संस्था को देने की तैयारी की जा रही है। इसमें किला गेट, सुतहट्टी सहित कई चौराहों को भी पीपीपी मॉडल के तहत विकसित करने की तैयारी चल रही है।