इंजीनियरिंग केवल डिग्री नहीं है। इसका उद्देश्य जीवन में बदलाव लाना है। मोबाइल, जीपीएस, इंटरनेट तकनीकी परिवर्तन के सूचक हैं। हमारे जीवन का कोई भी क्षेत्र इंजीनियरिंग से अछूता नहीं है।
पर यह दुखद है कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विश्वेश्वरैया और कलाम जैसे कुछ ही नाम लोगों को याद आते हैं। देश के इंजीनियरिंग कॉलेजों से हर साल हजारों डिग्रीधारी निकलते हैं पर वे मात्र तकनीकी श्रमिक ही होते हैं।
जिनका लक्ष्य नौकरी तक सीमित होता है। जरूरत है कि छात्र इंजीनियर बनें। ये बातें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिक पद्मश्री डा. प्रेमशंकर गोयल ने शनिवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के
19वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।उन्होंने कहा कि हमारे ही इंजीनियर विदेशों में अच्छा काम और नाम दोनों करते हैं मगर अपने देश में हाशिए पर रहते हैं, क्यों। इसके लिए हमारे देश का वातावरण जिम्मेदार है
या हमारी मनोवृत्ति। इस पर चिंतन करना होगा। हमारे संस्थान नई खोज में रुचि रखनेवाले इंजीनियर नहीं निकाल पा रहे हैं। ऐेसे में इंजीनियरिंग में प्रवेश परीक्षा के लिए नीति बनाने वालों को पुनर्विचार करने की जरूरत है।
राज्यपाल और कुलाधिपति राम नाईक के नहीं आ पाने की स्थिति में उनके प्रतिनिधि के रूप में समारोह के अध्यक्ष और कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने उनका लिखित भाषण पढ़ा। कहा कि मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित किया
जाना चाहिए। हमें यह ध्यान देने की जरूरत है कि धन के अभाव में कोई भी विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न हो। उपाधि धारकों के जीवन का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। वास्तविक दुनिया में कदम रखते हुए वे सपनों को हकीकत
में बदलने की चेष्टा करें। समारोह में कुलपति के रूप में प्रो. डीडी दूबे ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के संचालन के लिए आवश्यक है कि आधार युक्त नीति को अपनाया जाए। भारत की परंपरागत शिक्षण प्रणाली में मातृभाषा हिंदी,
संस्कृत, गणित के साथ अंग्रेजी एवं वर्तमान में कंप्यूटर शिक्षा को भी सामान्यत: समाहित किया गया है। दीक्षांत समारोह में सत्र 2014-15 में विभिन्न विषयों के सर्वोच्च अंक पाने वाले 54 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किया
गया। इसके साथ ही दस संकायों के 339 शोधार्थियों में से उपस्थित को पीएचडी उपाधि दी गई। इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल माता प्रसाद, कुलसचिव डा. देवराज, वित्त अधिकारी एमके सिंह, कार्यपरिषद एवं
विद्यापरिषद सदस्य, पूर्व सांसद कमला प्रसाद सिंह, प्रबंधक अशोक सिंह, पूर्व प्राचार्य डा. राधेश्याम सिंह, डा.देवेश उपाध्याय आदि मौजूद थे। संचालन डा. एचसी पुरोहित ने किया।