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तुलसी में है तनाव दूर करने के गुर

Wed, 10 Feb 2016 12:49 AM IST
जौनपुर ब्यूराे
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केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान(सीडीआरआई ) के मुख्य वैज्ञानिक डा. राकेश मौर्या ने कहा कि तनाव, मधुमेह, हड्डी क्षीणता आदि रोगों का निदान प्राकृतिक वनस्पतियों से संभव है। वर्तमान में समाज का हर तीसरा व्यक्ति उक्त
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 बीमारियों से पीड़ित है। उक्त बातें उन्होंने मंगलवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में 19वें दीक्षांत समारोह के पहले आयोजित व्याख्यानमाला में कहीं। कहा कि तुलसी से तनाव को दूर किया जा सकता

है। उन्होंने कहा कि देश में आज बहुत से लोग हड्डी, मधुमेह और तनाव से पीड़ित है। बाजार में इसकी दवाएं विभिन्न कंपनियों की आ रही हैं और लोग इस्तेमाल भी कर रहे हैं। इसका शरीर पर दुष्प्रभाव भी पड़ रहा है। इससे
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अन्य कई बीमारियां हो जा रही हैं। हम इन बीमारियों का निवारण प्राकृतिक पौधे और पदार्थ से मिली दवाओं से कर सकते है, जिसका दुष्प्रभाव शून्य है। इसे सीडीआरआई के वैज्ञानिकों ने अपनी खोज में साबित किया है। उन्होंने बताया

 कि हमारी टीम ने आयुर्वेदिक, चरक संहिता, यूनानी सिस्टम, सिद्धा एवं चाइनीज पद्धतियों का अध्ययन करने के बाद अपने देश के 93 पौधों पर अध्ययन किया। उसमें से नौ महत्वपूर्ण पौधे चयनित किये गये। इन पौधों में उक्त

बीमारियों को ठीक करने की क्षमता है। शीशम के पौधे से हड्डी के तमाम रोगों का इलाज तुलसी के पत्ती से तनाव का इलाज और विजयशाल के पौधे से मधुमेह को दूर करने की खोज मेरी टीम ने की है। देश के चार प्रमुख

अस्पतालों के सहयोग से उक्त दवाओं की पुष्टि भी की गई। डा. मौर्या ने कहा कि आज समाज फिर पुराने आयुर्वेदिक पद्धति की ओर लौट रहा है। उन्होंने बताया कि 30 वर्ष के बाद मनुष्य में आस्टोब्लास्ट की समस्या होती है। 30 से

 50 की उम्र में हड्डी के क्षरण और बढ़ने की समस्या होती है। इस समस्या का निदान ढाक के पौधे से बनी दवा से किया जा रहा है। इससे पैर, घुटने और अन्य दर्द में इस्तेमाल करने पर लाभ हो सकता है। दूसरा महत्वपूर्ण रोग

तनाव का है शरीर में किसी भी प्रकार का तनाव है वह तुलसी के पत्ते से दूर किया जा सकता है। ऐसे रोगी को प्रतिदिन 10 ग्राम हरी तुलसी के पत्ते का सेवन करना चाहिए। तीसरा सबसे प्रमुख रोग मधुमेह है, इसके लिए

विजयशाल के पौधे से बनायी गयी गिलास में पानी रखकर पीने से इसे कम और दूर किया जा सकता है। यह प्रयोग हर आदमी आसानी से कर सकता है। हमारी टीम ने इन्हीं पौधों से इन तीनों प्रमुख रोगों के इलाज के लिए औषधि

 बनाई है। उनका मानना है कि रोग को ठीक करने के लिए इन पौधों की पहचान करके ही उपयोग करे। इससे पहले डा. राकेश मौर्या को पुष्प देकर प्रो. डीडी दूबे, डा. एके श्रीवास्तव ने स्वागत किया। संचालन संयोजक डा. अजय द्विवेदी

 ने किया। इस अवसर पर डा. एचसी पुरोहित, डा. मनोज मिश्र, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार, डा. आलोक गुप्ता, पंकज सिंह, सुशील कुमार, नृपेन्द्र सिंह, विनय वर्मा, झांसी मिश्रा आदि उपस्थित रहीं। अंत में डा. बीडी शर्मा ने उपस्थित लोगों के प्रति आभार जताया।
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