बुनियादी शिक्षा का हाल बेहाल है। डेस्क और बेंच की बात तो दूर बच्चों के बैठने के लिए ठीक से टाटपट्टी का भी इंतजाम नहीं है। शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा भी अधिकतर विद्यालयों में नहीं हैं। बद इंतजामी का ही नतीजा है कि जितने छात्रों का विद्यालयों में पंजीकरण हुआ है उसकी आधी भी संख्या बच्चों की विद्यालय में नहीं होती। आधा सत्र बीत गया लेकिन पांचवीं कक्षा को छोड़ किसी भी कक्षा के छात्रों को सभी विषयों की किताबें नहीं मिल सकी हैं।
यह हाल तब है जब जिला में हर महीने शिक्षक और कर्मचारियों पर करीब 42 करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट खर्च होता है। सुप्रिम कोर्ट के चार सप्ताह में बेसिक स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं देने के आदेश के बाद अमर उजाला ने सोमवार को कुछ प्राथमिक स्कूलों की पड़ताल की तो नतीजे चौंकाने वाले दिखे।
केस एक ः करंजाकला विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय अभयचंदपट्टी में दोपहर के 11:45 बजे कुछ बच्चे फील्ड में तो कुछ कक्षा में शोर मचा रहे थे। एक शिक्षामित्र और तीन अध्यापक तैनात हैं। प्रधानाध्यापक एक शिक्षक के साथ परिसर में बैठकर आपस में गप्प लड़ा रहे थे। बाकी शिक्षकों का पता नहीं था।
विद्यालय में कुल 117 बच्चों का पंजीकरण है। प्रधानाध्यापक ने दावा किया कि 75 बच्चे आए हैं लेकिन मौके पर 25 से 30 बच्चे ही दिखे। शौचालय इस्तेमाल लायक नहीं है। बच्चों को बैठने के लिए टाटपट्टी का इंतजाम है। बच्चों ने बताया कि मिडडे मील मिलता है।
केस दो ः सुईथाकला विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय सरपतहा में प्रधानाधियापिका समेत दो सहायक अध्यापक व एक शिक्षामित्र एक ही कमरे में बैठे थे। यहां 81 बच्चों का पंजीकरण हुआ है लेकिन मौके पर 30 से 40 बच्चे ही नजर आए। पुरानी बिल्डिंग जर्जर होने के कारण ढहा दी गई है। अब बच्चों को आंगनबाड़ी कक्ष और तीन अतिरिक्त कक्षों में बच्चों को बैठाया जाता है। यहां शौचालय बने है परंतु एक में दरवाजा नहीं है। दूसरे में गंदगी का अंबार लगा है।
कक्षा पांच की छात्रा रेश्मी अंजू व कक्षा चार की छात्रा मोनी नेहा ने बताया कि भोजन मीनू के अनुसार नही मिलता यहां तक की दूध आज तक कभी नहीं मिला है।
केस तीन ः मडियाहूं विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय रामनगर द्वितीय पर 10 बजे बच्चे बाहर खेल रहे थे। कुल 199 बच्चों का विद्यालय में नामांकन है जिस में कुल 30 बच्चे विद्यालय में मौजूद थे। विद्यालय में कुल 5 अध्यापक तैनात हैं। चार अध्यापक उपस्थित थे।
बच्चे टाटपट्टी पर बैठते हैं। पेयजल के लिए लगा हैंडपंप एक साल से खराब है।शौचालय अधूरा है । प्रधानाध्यापक चन तारा देवी भले ही दावा कर रही थी कि मिड डे मील बनता है किंतु 10 बजे तक वहां कोई रसोइयां मौजूद नहीं था। प्रधान पति जिलेदार सोनकर व सेक्त्रस्ेटरी विनोद सहाय ने बताया कि धन के अभाव के कारण अधूरा कार्य नहीं हो पा रहा है।
केस चार ःप्राथमिक विद्यालय ददरा में 11 बजे तक 30 बच्चे मौजूद थे। प्रधानाध्यापक रेनू ने बताया कि कुल 85 बच्चों का नामांकन हुआ है। शौचालय जर्जर हालत में है । रसोई कक्ष में कूड़ा भरा गया है। भोजन पंचायत भवन में बन रहा था । हैंडपंप की स्थिति खराब है। बाउंड्रीवाल का निर्माण नहीं हुआ है। बच्चे टाट पट्टी पर बैठे थे। विद्युतीकरण नहीं हुआ है।
केस पांच ःमछलीशहर ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय किशुनदासपुर में शौचालय, किचन, पीने के पानी का इंतजाम नहीं है। बच्चे टाटपट्टी पर बैठे थे। वर्ष 2006 मे भूकंपरोधी भवन का निर्माण किया गया है पर इस समय भवन की दिवारो मे दरार आ गयी है। भवन जर्जर हाल मे है बच्चो व टीचरो के लिए शौचालय नही हैं । किचन शेड नही है। जिस कमरे में बच्चे बैठते है उसी मे भोजन बन रहा था। यहां 70 बच्चे पंजीकृत हैं पर मौके पर 20 बच्चे ही मिले।
विद्यालय में न तो विद्युतीकरण हुआ है और न ही बाउंड्रीवाल का निर्माण हुआ है। प्रधानाध्यापक प्रेम नाथ गौड का कहना है की शौचालय व किचन का पैसा खाता मे पडा है पर स्कूल की जमीनी विवाद की वजह से ग्रामीण निर्माण नही कराने दे रहे है।
केस छह ः बरसठी विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय गनेशपुर में 90 बच्चों का पंजीकरण है लेकिन मंगलवार को 11:30 बजे 58 बच्चे उपस्थित थे। पांचवीं कक्षा के बच्चों को किताबें वितरित कर दी गई हैं लेकिन बाकी कक्षा के बच्चों को सभी किताबें नहीं मिल सकीं हैं। यहां प्रधानाध्यापक नीलम यादव सहित एक सहायक अध्यापक महेश मौर्या और शिक्षामित्र रीमा देवी मौजूद थीं।
बच्चे टाटपट्टी पर बैठ थे। शौचालय उपयोग लायक नहीं है। बच्चे बाहर खेत में जाते हैं। स्कूल में वायरिंग हुई है लेकिन न तो कोई बल्व लगा है और न तो पंखे। मंगलवार को दाल चावल का दिन था लेकिन रसोइयां राधा देवी चावल सब्जी बना रही थी।
प्रधान गुलाब यादव ने बताया कि नोट बंदी के कारण पैसे नही है जिसके कारण दाल नही खरीद पाया। दुकानदार के यहां पहले से ही काफी उधार है। विद्यालय के बच्चे अध्यापको की देखरेख मे अन्दर ही बैठे थे।