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शाही किले में वार्षिक पास पर लगी पाबंदी

Tue, 04 Jul 2017 11:51 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जौनपुर
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शाही किला
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जौनपुर। शाही किले में वार्षिक पास पर एक जुलाई से पाबंदी लगा दी गई। इससे शहर के वरिष्ठ नागरिकों की सामाजिक संस्था मार्निंग वाकर्स एसोसिएशन ने नाराजगी जताई है। संगठन के लोगों ने इस फैसले को तुगलकी फरमान करार देते हुए पुरानी व्यवस्था को बहाल किए जाने की मांग की है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री को भेजे गए पत्रक में कहा गया है कि एक तरफ पीएम मोदी योग को बढ़ावा देने की बात कर रहे तो दूसरी तरफ शहर में वरिष्ठ नागरिकों को घूमने फिरने के लिए मौजूद मात्र एक स्थल पर भी पाबंदी लगा दी गई।
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वर्ष 1983 से ही शहर के वरिष्ठ नागरिकों की सामाजिक संस्था मार्निंग वाकर्स एसोसिएशन के सदस्यों और अन्य लोगों को भी सूर्योदय से पूर्व शाही किले में भ्रमण के लिए पुरातत्व विभाग की ओर से वार्षिक शुल्क जमा कराकर पास जारी किया जाता था। 35 रुपये वार्षिक शुल्क पर पिछले वर्ष 2015-16 के लिए भी पास जारी किया गया था।

चालू वर्ष के लिए इन लोगों से पास के लिए आवेदन नहीं जमा कराया गया। मार्निंग वाकर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विरेंद्र प्रधान और महामंत्री घनश्याम साहू का कहना है कि पास के लिए कई बार कहा गया लेकिन विभाग की ओर से न तो शुल्क जमा कराया गया और न ही आवेदन जमा करवाया गया। लोग रोज की तरह बेरोकटोक सूर्योदय से पहले शाही किला में भ्रमण के लिए आते रहे। एक जुलाई को जब संगठन के पुरुष और महिलाएं शाही किले में भ्रमण के लिए पहुंची तो लोगों को मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया।
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उनसे कहा गया कि पास की व्यवस्था अब खत्म कर दी गई है। किला में प्रवेश के लिए 15 रुपये प्रतिदिन शुल्क जमा करना होगा। इससे खफा मार्निंग वाकर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय पर्यटन मंत्री डा. महेश शर्मा को पत्रक भेजा है। मांग की गई है कि शाही किले में वार्षिक पास की पुरानी व्यवस्था बहाल की जाए। यह भी कहा गया है कि शहर में वरिष्ठ नागरिकों को घूमने फिरने के लिए कोई और जगह नहीं जहां नगर के वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं डाक्टर की सलाह पर सुरक्षित स्थान पर टहल सकें।
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