बैंक से लेकर एटीएम तक नकदी का संकट खड़ा हो गया है। नकदी के संकट के चलते एटीएम सेवा भी फेल हो गई है। एटीएम से पैसे निकालने के लिए इस चिलचिलाती धूप में भी 40 से 50 किलोमीटर का सफर तय कर लोग शहर में आ रहे। धूप में घंटों लाइन लगाने के बाद भी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। एटीएम की चरमराई व्यवस्था ने एक बार फिर से नोटबंदी जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। किसी को शादी के लिए पैसे चाहिए तो किसी को इलाज के लिए । खाते में पैसे होने के बाद भी लोग अपनी जरूरत को पूरा नहीं कर पा रहे। बैंक से लेकर एटीएम तक की चरमराई व्यवस्था पर बैंक के अफसर भी जुबान नहीं खोलना चाहते।
शनिवार को बैंकों में अवकाश था। पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए एटीएम ही एक विकल्प रहा लेकिन अधिकतर एटीएम में ताले लटक रहे हैं। शहर के दो चार एटीएम बूथों से पैसे जरूर मिल रहे थे लेकिन लंबी लाइन होने के कारण दोपहर बाद वहां भी ताला लटक गया। नगर के रुहट्टा स्थित एसबीआई के सुबह दस बजे तक लंबी लाइन लगी थी। चिलचिलाती धूप में लोग सिर पर अखबार, गमछा या रूमाल रख कर लाइन में खड़े रहे। लाइन में लगे मड़ियाहूं के जमालापुर निवासी दिनेश ने बताया कि बहन के प्रसव के लिए पैसे की आवश्यकता है। शुक्रवार को भी पैसे निकालने आया था लेकिन कहीं भी पैसा नहीं मिला।
आज चार एटीएम बूथों का चक्कर लगाते यहां पहुंचा हूं। कोई गारंटी नहीं की एटीएम तक पहुंचते पहुंचते कैश रहेगा या खत्म हो जाएगा। बक्शा के वीरभानपुर गांव से आए कैलाश ने कहा कि भांजे की शादी 15 मई को है। 20 हजार रुपये की जरूरत है। बैंक में दो हजार से अधिक भुगतान नहीं किया जा रहा। एटीएम से भी रुपये मिलने की उम्मीद नहीं है। सिकरारा से आए विनय कहते हैं कि 23 किमी से यहां पैसे निकालने आया हूं। शहर भर चक्कर लगाने के बाद याहां लाइन में लगा हूं। पैसा मिल गया तो मेहनत सफल हो जाएगी।