20- दोस्ती की खबर के लिए आशीष बीरबल की फोटो।
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केराकत। कोई जब राह न पाए, मेरे संग आए, पग-पग दीप जलाए, मेरी दोस्ती मेरा प्यार... फिल्म दोस्ती का यह गीत गुनगुनाते बीरबल सोनकर और आशीष विश्वकर्मा की जोड़ी दूसरों के लिए मिसाल बनी हुई है। शारीरिक अक्षमता के बावजूद दोनों एक-दूसरे का सहारा बनकर अपने परिवार का भरण पोषण कुशलता से कर रहे हैं। उनकी दोस्ती को 11 वर्ष हो गए, मगर कहीं कोई बाधा और द्वेष नहीं आई। उनका साथ इस कदर मजबूत हो चुका है कि दोनों एक-दूसरे के पूरक बन गए हैं।
तहसील क्षेत्र के खर्गसेनपुर निवासी 34 वर्षीय बीरबल सोनकर नेत्रहीन हैं तो 29 वर्षीय आशीष विश्वकर्मा के दोनों पैर नहीं हैं। दोनों एक ही गांव के हैं और बचपन से ही साथ रहते आ रहे हैं। उम्र के साथ जब पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ी तो उनके सामने भरण-पोषण की चुनौती भी बढ़ने लगी। किसी पर बोझ बनने की बजाए उन्होंने आत्मनिर्भर बनने की ठानी। दोनों के लिए ही अलग-अलग जीवन-यापन कठिन था। लिहाजा दोनों एक-दूसरे का सहारा बन गए। साझेदारी में ही कबाड़ खरीदने का धंधा शुरू किया। आशीष ठेलागाड़ी पर सवार होकर रास्ता बताते हैं तो बीरबल गाड़ी को धक्का लगाते हुए आगे ले जाते हैं। गांव-गांव जाकर घरों से कबाड़ खरीदते हैं और फिर उसे बाजार में लाकर बेचते हैं। अपने गाने के साथ लोगों का ध्यान खींचते हुए वह अपने धंधे को आगे बढ़ा रहे हैं। जिस गांव और जिस राह से वह गुजरते हैं, वह चर्चा में आ जाते हैं। उनके जज्बे को देखकर हर कोई सराहना करते नहीं थकता। आशीष पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है, जबकि अन्य अभी पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार की जिम्मेदारी आशीष के ही कंधों पर है। दूसरी तरफ बीरबल सोनकर की शादी हो चुकी है। उन्हें एक 11 वर्ष का पुत्र भी है। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े बीरबल ने अपने बूते एक बहन की शादी भी की है। दूसरी बहन अभी पढ़ रही है। अपनी दोस्ती के बाबत दोनों का कहना है कि हम दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हैं। अंतिम दम तक साथ नहीं छोड़ेंगे। अब तक कोई ऐसा मौका नहीं आया, जब एक-दूसरे से अलग होना पड़ा। बताया कि कभी-कभी कुछ मुद्दों पर मनमुटाव होता भी है तो कुछ घंटे बाद ही सब कुछ भूलकर हम लोग साथ में आ जाते हैं।