जौनपुर में रमजान के मुकद्दस महीने की शुरुआत 24 अप्रैल से मानी जा रही है। मुस्लिम समाज के लोग इसके लिए अभी से तैयारियों में जुट गए हैं। हालांकि इस बार उनके सामने लॉकडाउन की चुनौती भी है। आमतौर पर रमजान में रोजा रखने के बाद शाम को मस्जिदों में जाकर लोग तरावीह पढ़ते हैं। एक-दूसरे को इफ्तार के लिए पार्टियों का आयोजन करते हैं। मस्जिदों में भीड़ बढ़ जाती है, मगर इस बार ऐसे नजारे नहीं दिखेंगे।
कोरोना महामारी से बचने के लिए शहर के सभी प्रमुख मौलानाओं ने घरों में रहकर ही इबादत करने की अपील की है। नमाज के साथ ही तरावीह भी घरों ही पढ़ी जाएगी। इसमें भी फिजिकल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। इफ्तार पार्टियों के आयोजन और उसमें शिरकत न करने को कहा गया है। अलबत्ता इसमें होने वाले खर्च से गरीबों, यतीमों को राशन वितरित करने की अपील की गई है, जिससे हर किसी के रोजे आसानी से मुकम्मल हो सकें।
पेश इमाम, बड़ी मस्जिद के मौलाना जफर का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण पूरी दुनिया में तबाही मची हुई है। यह संकट की घड़ी है। लिहाजा हर व्यक्ति सरकार की हिदायतों पर अमल करते हुए इबादत करे। किसी को नमाज और तरावीह के लिए मस्जिद में आने की जरुरत नहीं है। घर में ही इसे पूरा करें। इफ्तार पार्टियों सहित ऐसे किसी आयोजन से बचें, जिसमें भीड़ जुट सकती हो। रमजान सब्र और पाकिजगी का महीना है। इस वक्त हमें इस पर और अधिक ध्यान देने की जरुरत है।
महफुजुल हसन का कहना है कि रमजान के दौरान जामा मस्जिद में सारे प्रोग्राम मुल्तवी कर दिए गए हैं। हर व्यक्ति लॉक डाउन का पालन करते हुए घरों में रहे और वहीं इबादत करे। घर में भी सिर्फ घर के ही सदस्य रहें, किसी बाहरी को न बुलाए। साबुन, तौलिया, बर्तन के इस्तेमाल में भी सावधानी बरतें। इफ्तारी पार्टी न करें। इसमें खर्च होने वाले पैसे को एकत्रित कर अपने आसपास के गरीब, असहाय को राशन दे दें, इससे शबाब मिलेगा। सरकार की हिदायतों को अमल में लाएं। -मौलाना
मौलाना कारी जिया जौनपुरी, शेर वाली मस्जिद का कहना है कि अल्लाह ने ऐसा कहीं नहीं कहा कि जान को सांसत में डालकर कोई इबादत करे। कोई मजबूरी हो तो भीड़भाड़ से बचने के लिए शरई छूट भी दी गई है। जान है तो जहान है, यह सबको समझना होगा। लॉक डाउन का पूरी तरह ऐहतेराम करें। घरों में रहकर ही नमाज ओर तरावीह पढ़ें। यह सबाक फर्ज होना चाहिए कि अमनोआमान को कायम रखते हुए मुल्क पर छाए इस महामारी रुपी संकट से बचने के लिए दुआ करे।
मुहउद्दीन हेसाम का कहना है कि रमजान में नमाज और तरावीह के लिए किसी को घर से बाहर निकलने की जरुरत नहीं है। घर में रहते हुए भी इबादत किया जा सकता है। मस्जिदों में वही जाएं, जिसे अनुमति दी गई है। कोई भी इस नियम को तोड़ने की कोशिश न करे। बीमारी किसी जाति और मजहब को देखकर नहीं आती। पूरी दुनिया में इस वक्त हालात बिगड़े हुए हैं। इससे बचने का कोई दूसरा उपाय नहीं है। हर किसी को इसका ध्यान रखते हुए अपने रोजे पूरे करने चाहिए।