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देवदूत बनकर उतरे भारतीय जवान

Wed, 29 Apr 2015 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो , जौनपुर
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नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप में भारतीय राहत एजेंसियों के जवान देवदूत बनकर उतरे। भूकंप की विभीषिका के सामने जहां नेपाल सरकार के खुद के राहत कार्य नाकाफी साबित होने लगे, वहीं भारत की एनडीआरएफ और अन्य
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 आपदा राहत एजेंसियों ने कमाल की सक्रियता दिखाई। भारतीय जवान असली हीरो हैं, यह कहते हुए महाराजगंज ब्लाक के कोल्हुआ गांव के प्रधानपति महेंद्र के चेहरे पर देश के जवानों को लेकर जहां नाज का भाव है, वहीं आंखों में

विनाशकारी भूकंप की दहशत भी साफ झलक रही थी। नेपाल में रहकर मूर्ति का कारोबार करने वाले महेंद्र बुधवार को घर पहुंचकर नेपाल त्रासदी के भयावह मंजर की तस्वीर दिखाई।
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महेंद्र सुबह छह बजे घर पहुंचे तो घर वाले लिपट कर रोने लगे। पत्नी और बच्चे फफक पड़े। भाई खुश नजर आए। महेंद्र ने कहा कि मेरी आंखों के सामने कई विशाल भवन देखते-देखते जमींदोज हो गए और सैकड़ों जिंदगियां क्षण भर में

मलबे में तब्दील हो गईं। बताते हैं कि शनिवार की उस मनहूस घड़ी को याद कर रूह कांप उठती है। उस समय में बोटेबहाल के दीप स्कूल पार्क में मैं मूर्तियां बेच रहा था। मेरी आंखों के सामने किंगडॉल चौक की बड़ी-बड़ी इमारतें पत्ते

 की तरह धराशायी हो रहीं थीं। चारों ओर चीख-पुकार मची थी, लेकिन उस वक्त सिवाय जान बचाने के लिए और कुछ नहीं सूझ रहा था।

 भागते समय एहसास हो रहा था कि पैरों तले जमीन साथ छोड़ रही है। अब तक सौ से ज्यादा भूकंप के झटकों ने नेपाल वासियों को खौफजदा कर दिया है। ऐसे में भारतीय आपदा राहत एजेंसियां और पुलिस के जवान देवदूत की तरह

 आए। हेलीकाप्टर और हवाई जहाज से भोजन सामग्री पहुंचाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। हालांकि अमेरिका, चीन और टर्की की एजेंसियां भी राहत कार्य में जुटी हैं, लेकिन भारतीय जवानों का जवाब नहीं। भूकंप पीड़ितों

 की हर तरह से वे मदद कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश से बस से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। पुलिस भी राहत कार्य में जुटी रही। बुधवार को घर वापसी पर घर वालों के साथ-साथ गांव वाले भी कुशल क्षेम पूछने पहुंच गए।
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