कोरोना के भय से मुंबई, सूरत, अहमदाबाद सहित अन्य शहरों से जिले में आए करीब तीन लाख प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री के गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत अब उन्हें गांव में ही रोजगार देने की कवायद में अफसर जुट गए हैं। उनसे गांवों में 25 तरह के कार्य कराए जाएंगे। इसके लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। 125 दिन का अभियान चलाकर प्रवासी श्रमिकों को उनकी योग्यता के अनुसार काम दिया जाएगा।
प्रदेश के जिन 31 जिलों में गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुआत हुई है, उसमें जौनपुर भी शामिल हैं। यहां पूर्वांचल में सर्वाधिक प्रवासी श्रमिक आए हैं। इन श्रमिकों को दोबारा पलायन से रोकने के लिए लगातार योजनाएं बन रही हैं। अभी उन्हें मनरेगा के तहत काम दिया जा रहा है। आगे भी काम जारी रखने के लिए विभागों को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। 125 दिनों तक चलने इस अभियान के तहत मजदूरों को 25 तरह के कार्य में उनकी कुशलता के अनुसार जोड़ा जाएगा। ज्यादातर कार्य ग्रामीण विकास से जुड़े हुए हैं। मजदूरों की उपलब्धता होने पर ज्यादा से ज्यादा काम देकर सरकार उन्हें गांव में ही रोकने की कोशिश में जुटी है। प्रवासी श्रमिकों से गांव में सड़क, ग्रामीण आवास, बागवानी, पौधरोपण, जल संरक्षण एवं सिंचाई, ग्राम पंचायतों में आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालयों आदि का निर्माण कराने, 14वें व राज्य वित्त से होने वाले कार्यो, मनरेगा से होने वाले कार्यो सहित 25 प्रकार के कार्यो को कराने की कार्य योजना बनाई जा रही है।