मीरगंज। प्राथमिक विद्यालय किशुनदासपुर का भवन के एक दिन पहले ही गिरने के बाद प्रशासन की नींद टूट गई है। किशुनदासपुर स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को प्राथमिक विद्यालय गोधना में शिफ्ट कर दिया गया है। अब जब तक नया भवन नहीं बनेगा तब तक किशुनदासपुर के बच्चे गोधना प्राथमिक विद्यालय में ही पढ़ेंगे। इसके लिए बृहस्पतिवार को बच्चों और अध्यापकों को गोधना में शिफ्ट कर दिया गया।
मछलीशहर ब्लॉक के ग्राम पंचायत किशुनदासपुर के प्राथमिक विद्यालय का भवन बुधवार शाम 4 बजे अचानक भरभरा कर गिर गया। गनीमत यह रही की स्कूल की छुट्टी कर दी गयी थी। इसके कारण कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। स्कूल के जर्जर होने और दीवार में बड़ी सी दरार आने की खबर अमर उजाला ने बुधवार के अंक में ही प्रमुखता से प्रकाशित की थी। लेकिन विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अब भवन जमींदोज होने के बाद अधिकारी अपने को बचाने की कोशिशों में लग गए हैं। स्कूल पहले से ही गोधना में शिफ्ट कर दिया गया था। जबकि सच्चाई यह है कि स्कूल गिरने के दिन बुधवार को भी स्कूल किशुनदासपुर में ही चला। बृहस्पतिवार की सुबह स्कूल खुलने पर विद्यालय पहुंचे शिक्षक और 35 बच्चों के साथ प्रधानाध्यापक बृजभान सिंह गोधना प्राथमिक स्कूल पहुंच गये। बच्चों के शिक्षण कार्य का संचालन शुरू करा दिया गया। प्रधानाध्यापक किशुनदासपुर बृजभान सिंह का कहना है की बीईओ मछलीशहर के निर्देश पर प्राथमिक विद्यालय गोधना में बच्चों का शिक्षण कार्य शुरू करा दिया गया है।
-
भूकंपरोधी भवन 18 साल भी नहीं चल पाया
बच्चों को भूकंप से बचाने के लिए बनाए गए किशुनदासपुर स्कूल का भवन 18 साल भी नहीं चल पाया। मछलीशहर ब्लॉक के किशुनदासपुर स्कूल का भवन जिस तरह से जमींदोज हुआ है, इसके बाद इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। भवन का निर्माण 2006 में कराया गया था। उस समय 2 लाख 40 हजार रुपये में इसका निर्माण कराया गया था। यह गुंबदनुमा भूकंपरोधी भवन बनाया गया ताकि स्कूल के शिक्षक पूरी कक्ष का संचालन एक साथ बीच में बैठ कर कर सकें। ग्राम प्रधान शिवकुमार गुप्ता का कहना है कि कहीं न कहीं गुणवत्ता में कमी रही होगी, तभी भवन इतनी जल्दी गिर गया।