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हाथ की मेहंदी छूटी नहीं धुली सिंदूर की लाली

Wed, 15 Feb 2017 01:06 AM IST
jaunpur
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कश्मीर के बांदीपोरा में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान मंगलवार को शहीद हुए सेना के जवान आशुतोष कुमार यादव का पार्थिव शरीर दो दिन बाद गांव में आने की उम्मीद है। आशुतोष थाना बदलापुर के सुल्तानपुर गांव के रहने वाले थे। आशुतोष के विवाह को अभी एक साल भी नहीं हुआ। दोंगा के लिए वह मार्च में आने वाले थे।
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आशुतोष कश्मीर में सेना की यूनिट 111 में तैनात थे। उनके आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद होने की सूचना पर घर पर चीख-पुकार मच गई। आशुतोष के साथी सिपाही कुलदीप सरोज निवासी आनापुर, मछलीशहर इस समय छुट्टी लेकर गांव आए हैं। मंगलवार सुबह कुलदीप ने रूंधे गले से  आशुतोष के शहीद होने की जानकारी उनके घर आकर दी।

सेना के सीओ के निर्देश पर कुलदीप ने आशुतोष की पारिवारिक पृष्ठभूमि की जानकारी उनके व्हाट्सएप पर दे दी है। आशुतोष यादव केंद्रीय विद्यालय में बीए की पढ़ाई के दौरान ही वर्ष 2014 में सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हो गए थे। उनका छोटा भाई संदीप कुमार बीएचयू से पढ़ाई कर रहा है। बड़ी बहन पूनम सल्तनत बहादुर पीजी कॉलेज बदलापुर से बीए तथा छोटी बहन पूजा इंटर प्रथम वर्ष की छात्रा है। पिता लाल साहब यादव वर्ष 1983 में सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे।
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लंबी बीमारी के कारण सेना के हास्पिटल में 2000 में उनका निधन हो गया था। इसके बाद घर की जिम्मेदारी बड़े पिता अधिवक्ता लालजी यादव के कंधे पर आ गई। आशुतोष की शादी 24 अप्रैल 2016 को महराजगंज ब्लॉक के डेल्हूपुर गांव निवासी रतीराम यादव की बेटी मधु के साथ हुई थी। शादी के बाद मधु कुछ दिन ही पति के साथ रही थीं। मार्च में आशुतोष का दोंगा होने वाला था।
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