ंब चकबंदी कार्यालय की जांच करने पहुंचे विधायक डा. हरेंद्र प्रसाद सिंह।
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धर्मापुर ब्लाक के उतरगांवा गांव में चकबंदी के दौरान गरीबों की जमीन बिना नापी किए चकआउट कर दिए जाने पर जफराबाद विधायक डॉ. हरेंद्र प्रसाद सिंह ने एसओसी (बंदो बस्त अधिकारी चकबंदी) संजय राय से नाराजगी जताई। इस पर एसओसी और विधायक के बीच तीखी बहस भी हुई। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीओ, एसीओ को प्रतिकूल प्रविष्टि देने और लेखपाल को निलंबित करने का निर्देश दिया है।
उतरगांवा गांव में 25 सालों से चकबंदी चल रही है। जिसमें बड़े पैमाने पर खेल हुआ है। लेनदेन कर अधिकारियों ने गरीबों की जमीनों को पैसे वालों को सौंप दिया है। आशा देवी नामक एक गरीब महिला के पास सिर्फ 10 बिस्वा जमीन है। आरोप है कि इस जमीन को सीओ (चकबंदी) ने एक मनबढ़ व्यक्ति को दे दिया।
महिला ने विधायक जफराबाद से मुलाकात कर आपबीती सुनाई तो उन्होंने चकबंदी विभाग के अधिकारियों को फोन किया। लेकिन उन्होंने उनकी बात नही सुनी। उल्टा महिला की जमीन का चकआउट कर दिया। रोती कलपती महिला विधायक के पास पहुंची तो उन्होंने उसे भरोसा दिलाया और एसओसी संजय राय के पास गए।
वहां संजय के पक्ष में कुछ अधिवक्ता आ गए। यह बात विधायक नागवार लगी। उन्होंने इसका विरोध किया। इसी पर कहासुनी हो गई और लोग नाराज हो गए। माहौल गरम होता देख अधिवक्ता वहां से निकल गए। इसके बाद डीएम की मध्यस्थता में दोनों पक्षों में वार्ता हुई। वार्ता में डीएम ने सीओ सुमेश पांडेय, एसीओ सुनील गुप्ता को प्रतिकूल प्रविष्ठि और लेखपाल प्रदीप को निलंबित करने का निर्देश दिया। एसओसी संजय राय ने बताया कि मामले में रूचि नहीं लेने और अनियमितता बरतने पर इनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
उधर, विधायक डा. हरेंद्र प्रसाद सिंह का कहना है कि गरीबों को न्याय दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इसमें किसी की दलाली नहीं चलेगी। जनता का शोषणा बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि चकबंदी में बड़े पैमाने पर धांधली हो रही है। इसकी जांच कराई जाए तो सब उजागर हो जाएगा।