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कथा सुनने से दूर हो जाते हैं कष्ट

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सतहरिया। अयोध्या धाम के संत स्वामी नारायणाचार्य ने कहा कि श्रीमद भागवत पुराण सभी ग्रन्थों की जननी है। इस कथा को सुनने मात्र से ही जीवन के सारे दुख दूर हो जाते हैं। मस्तिस्क का तनाव दूर हो जाता है। वह मुंगराबादशाहपुर के बहोरिकपुर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में प्रवचन कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि भगवान के मुख से निकली हुुई बात ही गीता है। इस लिए इसे सभी कथाओं के सार का दर्जा मिला है। इसमें तनिक भी संशय करना अज्ञानता है। उन्होने ब्रज की माटी के महिमा का वर्णन करते हुए कहा वहा कि वहां का भ्रमण करने मात्र से ही भाव में अभूतपूर्ण परिवर्तन हो जाता है। वास्तविक जीवन का ज्ञान हो जाता है। उन्होंने बताया कि जो श्री शब्द भागवत गीता के आगे जोडा गया है वह मां लक्ष्मी जी के नाम का सम्बोधन है। भारतीय संस्कृति में आयी गिरावट पर क्षोम प्रकट किया। कहा आदर सम्मान में प्राणाम शब्द में आयु विधा व यश जैसे सद्बुद्वि का प्रार्दुभाव है। फि र इसके स्थान पर दूसरे शब्द का उपयोग करना ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि कल्पवृक्ष से मनोवंाछित फल मिल सकता है। किन्तु भगवान का सानिध्य व बैकुण्ब्ठ नहीं प्राप्त हो सकता है। इसे प्राप्त करने के लिए सद्गुरू के बताये हुए सन्मार्ग पर चलना होगा। ज्ञानी व मूर्ख दोनों भगवान को प्राप्त कर सकते है। बशर्ते उनमे भाव होना चाहिए। राजा परीक्षित ने हरि कथा का श्रवण करके भगवान के सानिध्य को प्राप्त कर लिया। जीवन के निर्धारण में कर्म प्रधान होता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय शंकर अज्जू ने कार्यक्त्रस्म में पहुंच कर संतो का आर्शीवाद लिया। मुख्य यजमान रविन्द्र नाथ त्रिपाठी ने परिवार के साथ कथा का श्रवण किया।
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