जिलाधिकारी भानुचन्द्र गोस्वामी की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित खरीफ गोष्ठी में किसानों ने खेती को चौपट कर रहे घड़रोज और वन सुअरा का मुद्दा उठाया। हालांकि संबंधित विभाग के अधिकारियों की ओर से इस समस्या के निदान के लिए कोई संतोषजनक उपाय नहीं बताए गए। जिसमें किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेती करने पर जोर दिया गया। साथ ही कृषि विभाग में संचालित योजनाओं की जानकारी दी।
गोष्ठी में मौजूद कलीचाबाद के किसान रमेश यादव ने कहा कि घड़रोज किसानों की गाढ़ी कमाई चौपट कर दे रहे हैं। खास तौर से नदी के किनारे के किसान सब्जी आदि की खेती करना छोड़ दिए हैं। वन सुअरा भी काफी नुकसान कर रहे हैं। किसान अपनी फसल की रखवाली करते हैं तो उन पर ये जानवर हमला भी बोल रहे हैं। इस पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने फसलों पर गोबर का छिड़काव करने का सुझाव दिया। जिस पर किसानों ने कहा कि यह प्रयोग वे देख चुके हैं कोई कारगर प्रयोग नहीं है।
वन अधिकारी ने कहा कि परमीशन लेकर घड़रोज को मारा जा सकता है। उप निदेशक कृषि अशोक उपाध्याय ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत कलस्टर प्रदर्शन, कृषि यंत्र वितरण, आत्मा योजना, दवा छिड़काव वाली मशीन, सोलर पम्प, एग्रीजक्शन योजना, कृषि रक्षा व खरीफ बीज बिक्री पर अनुदान आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने कहा कि वैज्ञानिक खेती के साथ-साथ खेत के मेड़ों पर शीशम, सागौन व यूकोलिप्टस आदि पेड़ों को लगाकर दोहरा लाभ प्राप्त किया जा सकता है। पापलर का पेड़ लगाकर 6-7 साल में सात लाख रुपये आय प्राप्त कर सकते है। खेतों के मेड़बंदी करके जमीन की उर्वरा शक्ति व जल संचय किया जा सकता है। उन्होंने किसानों से पशु पालने पर जोर दिया।
कहा कि दलहन की समस्याओं में वैज्ञानिकों का प्रयोग कर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। वहीं सूरजमुखी की खेती कर अच्छी आय कमाई जा सकती है।इस मौके पर कृषि वैज्ञानिक डा. संदीप, डा. सुरेश कन्नौजिया, एआर कोआपरेटिव गणेश, एक्सईएन सिंचाई एसके सिंह, एक्सईएन नलकूप चन्द्रशेखर सिंह आजाद एक्सईएन विद्युत एससी सोनोदिया ने भी विभाग से संबंधित योजनाओं पर प्रकाश डाला। इस मौके पर सीडीओ शीतला प्रसाद श्रीवास्तव, पीडी तेजप्रताप मिश्र व डीडीओ दयाराम व सहायक कृषि तकनीक रमेश यादव उपस्थित रहे।