इस तरह धनियामऊ कांड में छह लोग शहीद हुए। पुल के पास, जहां पुलिस ने जनता पर गोली चलाई थी, आज शहीद स्मारक बना है, जिस पर शहीदों के नाम अंकित हैं। आंदोलन पूरे जिले में फैल गया।
कई तहसील मुख्यालयों और पुलिस थानों पर जनता ने हमले किए। रेलवे स्टेशन, कचहरी और डाकखाने भी निशाने पर रहे। सुजानगंज थाने पर जनता ने अधिकार कर शस्त्रागार लूट लिया। इन हथियारों का आगे क्रांतिकारियों ने पुलिस के विरुद्ध इस्तेमाल किया। (संवाद) मछलीशहर तहसील पर भी कब्जा हुआ और बीज गोदाम लूट लिया गया। गिरफ्तार नंद किशोर तिवारी को छुड़ा लिया गया। एक सभा में भाषण देते समय उन्हें और माता प्रसाद शुक्ला को गोली मार दी गई। बैरमा (सुजानगंज) के चौकीदार का घर लूटकर जला दिया गया और एक पटवारी की पिटाई की गई।
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