जौनपुर। शहर के सबसे पुराने इमामबाड़ा छतरीघाट से अलम और दुलदुल का जुलूस निकला। जुलूस में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे या अली या अब्बास या हुसैन की सदा देते हुए बढ़ रहे थे। मजलिस की शुरुआत सोजख्वानी से असगर हुसैन ने की। पेशखानी एहतेशाम जौनपुर ने की और मजलिस को अजीम बहराइची ने खेताब किया।
मजलिस में अजीम बहराइची ने हजरत जैनब के दोनों लाल औन-मोहम्मद का मसाएब पढ़ा। उन्होंने कहा कि दोनों बहुत ही बहादुरी से यजीदी फौज का सामना करते हुए शहीद हो गए। जुलूस अंजुमन जुल्फे कारिया के साथ इमाबाड़ा दालान पर पहुंचा। यहां से कल्बे हसन के नेतृत्व में तुर्बत निकाली और दुलदुल से मिलन हुआ। अंजुमन गुलशने इस्लाम ने नौहा पढ़ा। इस दौरान अलमदार रिजवी, शहेंशाह हुसैन, असगर अली, मुन्ना, असगर मेंहदी, शाहिद मरसियांख्वा, बहादुर अली आदि मौजूद रहे। जुलूस कोठियाबीर मुहल्ले में पहुंचा। यहां पर हाजी अब्बास इमामबाड़े से ताबूत सकीना और गहवारे अली असगर अंजुमन असगरिया के नेतृत्व में निकला और दुलदुल से मिलन हुआ। यहां पर मोमनीन के लिए नज्र का एहतेमाम किया गया था सभी ने नज्र का प्रसाद (तबररुक) ग्रहण किया। जुलूस पुन: छतरीघाट जाकर समाप्त हुआ। अंजुमन कासिमियां की ओर से इमामबाड़ा चहारसू से पांच अलम का जुलूस निकला। जुलूस की मजलिस को इसरार हुसैन एडवोकेट ने पढ़ा। जुलूस में अंजुमन जाफरिया लोगों ने मातम किया। जुलूस के साथ मातम करते हुए शहरयार, एएम डेजी, शहेंशाह हुसैन, जावेद सुल्तान, नासिर रजा, शौकत हुसैन, शोएब रजा, आदि मौजूद रहे। जुलूस पुन: बाबू राम प्रधान की गली से होता हुआ इमामबाड़ा चाहरसू में जाकर संपन्न हुआ।