जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के मूल्यांकन व्यवस्था से परीक्षा नियंत्रक ने खुद को अलग कर लिया है। ऐसे में परीक्षक यह नहीं समझ पा रहे हैं कि मूल्यांकन के लिए कौन जिम्मेदार है। कुलपति को जिम्मेदार माना जाए या फिर परीक्षा नियंत्रक को। करीब 25 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होना है। पहले दिन ही सब कुछ बिखरा दिखा। परीक्षा नियंत्रक रामशिरोमणि यादव ने मूल्यांकन की जिम्मेदारी लेने से हाथ खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि मूल्यांकन व्यवस्था के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। मूल्यांकन शुरू होने से पहले न तो कुछ बताया गया और न ही बाद में कोई जानकारी दी गई। इस नाते जिसकी व्यवस्था है वही जवाब देगा।
शिक्षक संघ के अध्यक्ष डा. अनुराग मिश्र का कहना है कि मूल्यांकन केंद्र की व्यवस्था को लेकर शनिवार को उनका प्रतिनिधि मंडल परीक्षा नियंत्रक से मिलने गया था। बातचीत के दौरान परीक्षा नियंत्रक ने कहा कि मूल्यांकन की व्यवस्था हमारी नहीं है। मूल्यांकन की व्यवस्था को कुलपति ने अपने हाथ में ले रखा है। मूल्यांकन संबंधी जानकारी वही दे सकते हैं। बता दें कि करीब 25 लाख कापियों का मूल्यांकन होना है। यदि यही व्यवस्था रही तो मूल्यांकन अधर में पड़ सकता है। मूल्यांकन कर रहे शिक्षक इस बात को लेकर पसोपेश में हैं कि मूल्यांकन संबंधी समस्या का निस्तारण कौन करेगा। परीक्षक अपनी समस्या किससे कहेंगे। उधर, कर्मचारी संघ पहले से ही मूल्यांकन व्यवस्था से अलग है। कोडिंग से लेकर मूल्यांकन की सारी व्यवस्था एक निजी एजेंसी को सौंप दी गई है। कुछ गिने चुने कर्मचारियों को ही मूल्यांकन में लगाया गया है। मूल्यांकन में जो लोग लगाए गए हैं उसमें से अधिकांश को कोई खास अनुभव नहीं है।